पत्थरबाजों के खिलाफ केस वापस लेने और उनकी रिहाई के बाद श्रीनगर जेल से कैदियों की संख्या क्षमता के अनुसार रह गई है। हालांकि पहले क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण जेल से कुछ कैदियों को अन्य जेलों में शिफ्ट किया गया था।
दूसरी जेलों में शिफ्ट कैदियों को वापस श्रीनगर की जेल में लाने की तैयारी है। करीब दो दर्जन कैदियों को लेह और किश्तवाड़ की जेल से श्रीनगर लाया जाएगा। श्रीनगर सेंट्रल जेल में तीन सौ कैदियों के रखने की क्षमता है।
आतंकवाद और अन्य अपराधों के कारण घाटी में सेंट्रल जेल को श्रीनगर से शिफ्ट करके नई जगह पर ले जाने के लिए भी सरकार ने गंभीरता से काम शुरू कर दिया है। नई जगह को चिह्नित किया जा रहा है, जो शहर से बाहर हो।
नई जगह पर बनाई जा रही जेल में कैदियों की क्षमता भी अधिक हो सकती है। कई कैदियों को जम्मू, हीरानगर आदि जेलों में भी शिफ्ट किया गया है। केस की सुनवाई श्रीनगर में होती है और इन कैदियों को जेल से कोर्ट ले जाने में काफी खर्चा आता है। आतंकी गतिविधियों में शामिल कैदियों को ही श्रीनगर से बाहर जेलों में रखा गया है।
गंभीर अपराध में शामिल कैदियों को फिलहाल शिफ्ट करने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। ओवर ग्राउंड वर्कर, सामान्य अपराधी ही वापस लाए जा रहे हैं। लेह और किश्तवाड़ जेल नई बनी है। इन जेलों में भी सौ के करीब कैदी रखने की क्षमता है। जेल विभाग के महानिदेशक डा. एसपी वैद के अनुसार इस मामले में अभी विचार चल रहा है और कुछ कैदी शिफ्ट किए जा सकते हैं।