मेजर अनीता की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर चुनौती की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मृतका की बहन ने मेजर अनूप की अंतरिम जमानत रद्द कर उसे हिरासत में लेने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस प्रफुल्ल सी पंत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दाखिल करने के आवेदन को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने मौखिक रूप पर कहा कि यह मामला दो पढ़े लिखे और वयस्कों के बीच लिव इन रिलेशनशिप का है। दोनों ने सहमति के साथ संबंध बनाए, लिहाजा आरपीसी की धारा 376 के तहत मामला स्थापित नहीं किया जा सकता है। इससे पूर्व अदालत में मृतका की बहन का पक्ष रखने के लिए पहुंचे एडवोकेट सुनील फर्नांडिस, आस्था शर्मा, मिट्ठू जैन और असीम साहनी ने मेजर अनूप कुमार को हिरासत में लेने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जस्टिस आलोक अराधे ने मेजर अनीता की मौत के मामले में आरोपी बनाए गए मेजर अनूप को 23 फरवरी 2017 को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया था। कोर्ट ने पाया था कि मृतका एक उच्च शिक्षित महिला थी जो सेना में अफसर रैंक पर कार्यरत थी। अदालत के समक्ष जो तथ्य और रिकार्ड पेश किए गए हैं, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि मेजर अनीता और मेजर अनूप के बीच लिव इन रिलेशनशिप था। कोर्ट ने अक्षय मनोज जय सिंघानी के मामले का हवाला दिया था, जिसमें आरोपी पर आरपीसी की धारा 376 के तहत प्रथम दृष्टया मामला स्थापित नहीं हो पाया था।