जम्मू में सड़क दुर्घटना में मारे गए युवक रितिश चौबर के परिवार ने पुलिस पर उन्हें डराने धमकाने और मामले से बाइक का जिक्र हटाने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि पुलिस दबाव बना रही है कि पूरा मामला मिनी बस चालक पर डाल दो। इसमें बाइक का जिक्र नहीं होना चाहिए।
मृतक रितिश चौबर की मां अनीता हंस ने अमर उजाला को बताया कि मेरे बेटे को बाइक चलानी नहीं आती थी। अगर वह बाइक नहीं चला सकता था, तो उसे बाइक क्यों दी गई? यदि रितिश बाइक चला भी रहा था तो उसके दोस्तों ने दुर्घटना के बाद बाइक वहां से क्यों उठाई? यदि वह दुर्घटना के वक्त मौके पर पहुंच गए तो क्या उनको रितिश को अस्पताल लेकर नहीं जाना चाहिए था? रितिश बाइक अकेला चला रहा था या फिर उसके साथ कोई और भी था? ऐसे कई सवाल हैं, जिसका जवाब पुलिस की तरफ से उनको नहीं दिया जा रहा। उल्टा पुलिस की तरफ से दोमाना थाने में बार-बार बुलाकर बयान देने को कहा जा रहा है।
दबाव बनाकर कहा जा रहा है कि वह इस मामले से बाइक सवारों और बाइक का नाम ही वापस ले लें। पूरा केस मिनी बस चालकों पर डालने के लिए कहा जा रहा है। अनीता का आरोप है कि पुलिस इस मामले में खुद की कहानियां बना रही है।
बता दें कि कानाचक पुलिस स्टेशन अंतर्गत आने वाले गांव बाबे तालाब के रहने वाले 19 वर्षीय रितिश चौबर की एक सितंबर को अपने बर्थडे के दिन ही सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में एक्सीडेंट करने वाली मिनी बस को जब्त करते हुए चालक को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। परिवार का कहना है कि सिर्फ मिनी बस चालकों को ही पकड़ा गया है। रितिश के साथ सुबह जो लड़के थे, उनसे कोई पूछताछ नहीं हो रही। न ही उन पर कोई कार्रवाई हो रही है।