मादक पदार्थों की तस्करी का रैकेट पूरे राज्य में फैला है। पंजाब, दिल्ली से आने वाली खेप युवाओं के बीच आसानी से पहुंच रही है। कश्मीर से भी मादक पदार्थों की सप्लाई की जा रही है। जम्मू में मादक पदार्थों के सेवन के कारण के कारण अब तक कई युवाओं की मौत हो गई है।
यह भी माना जा रहा है पुलिस के कुछ लोगों की मदद से ड्रग व्यापार फल-फूल रहा है। नशीले पदार्थों के सेवन से हो रही मौत का भी कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। पीड़ित परिवार मामले सामने नहीं लाते।
मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान छेड़े हुुए टीम जम्मू के अध्यक्ष जोरावर सिंह के अनुसार पिछले दो-तीन साल से जम्मू में चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन की खपत बढ़ी है। पुलिस भी इस मामले में बड़े लोगों पर शिकंजा नहीं कस पा रही है। छोटी खेप पकड़कर दावे कर रही है।
पुलिस का दावा है कि संजीवनी के तहत पिछले छह महीने में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। एक जनवरी से लेकर मई तक पुलिस ने 102 केसों को दर्ज किया है। इसमें 80 किलो हेरोइन, 41 किलो चरस, तीन किलो गांजा और सैकड़ों किलोग्राम भुक्की जब्त की है।
सबसे बड़ी खेप पांच करोड़ रुपये की हेरोइन पकड़ना रहा। एसएसपी जम्मू सुनील गुप्ता का दावा है कि फिलहाल ड्रग माफिया में कोई संगठित क्षेत्र सामने नहीं आया है। छिटपुट गिरोह ही इसमें शामिल हैं। पुलिस का ड्रग माफिया के खिलाफ लगातार अभियान जारी है।
कहीं कुछ नहीं बोलते हैं। उन्होंने कहा अभिभावकों को भी खुलकर सामने आना चाहिए।
राजनीतिक दबाव में पुलिस
पुलिस
- फोटो : Demo. Pic.
करोड़ों रुपये ड्रग माफिया के इस जाल में राजनीतिक संरक्षण भी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कई बार मादक पदार्थों की सप्लाई करने वाले लोगों को छुड़ाने के लिए राजनीतिक दबाव भी सहना पड़ता है। कई वरिष्ठ राजनीतिज्ञ यह कहकर सिफारिश करते हैं। जो लड़का पकड़ा गया है, वह बेकसूर है और उसे छोड़ दिया जाता है।
छोटे-मोटे मामले में हलका केस डाला जाता है, लेकिन बड़े केसों में एनडीपीएस एक्ट लगाया जाता है। पुलिस के भी लोग तस्करों के साथ जुड़े हुए हैं। जो पहले से ही सूचना देते हैं औैर तस्करों से बड़ी खेप बरामद नहीं होती है।
नहीं कोई नशा मुक्ति केंद्र
नशे के बढ़ते प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी इसकी चपेट में है। वहीं इन युवाओं के लिए नशा मुक्ति केंद्र नहीं होने के कारण भी समस्या विकराल रूप ले रही है। हालांकि मुट्ठी क्षेत्र में एक गैर सरकारी संगठन नशा मुक्ति केंद्र चला रही है। इस केंद्र में भी फिलहाल पुलिस ने कोई भी नशे के आदी युवा को नहीं भेजा है।
कुछ प्राइवेट तौर पर युवा इसमें पहुंचे हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव के कारण पूरा इलाज नहीं हो पा रहा है। जोेरावर सिंह जम्वाल के अनुसार अधिकतर युवाओं को पंजाब में भेजा गया है। पंजाब में नशा मुक्ति केंद्र हैं। जो लाभ के बिना युवाओं का इलाज कर रहे हैं। कई युवाओं को पंजाब भेजा गया है।
अभिभावक दबा जाते हैं बात
नशे के आदी बच्चों के लिए नशा मुक्ति कराने के लिए अक्सर अभिभावक भी बात दबा जाते हैं। समाज सेवक अजीत कपूर के अनुसार परिवार वाले भी समाज में बदनामी के डर से कहीं कुछ नहीं बोलते हैं। उन्होंने कहा अभिभावकों को भी खुलकर सामने आना चाहिए।