हत्या के प्रयास के एक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी शब्बीर अहमद को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी बरकरार रखा। सरकार की ओर से दायर अपील को जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
पुलिस केस के अनुसार 10 अक्तूबर 2010 को एक होंडा सिटी कार (पीबी 08 बीजे-3553) उधमपुर से बटोत की ओर तेज रफ्तार से आ रही थी। कुद में पेट्रोलिंग पुलिस ने जब उसे रोकने का प्रयास किया तो उसने पुलिस कर्मियों को ठोकर मारते हुए पत्नीटाप की ओर कार मोड़ दी। अभियोजन के अनुसार पेट्रोलिंग टीम के सदस्य बाल-बाल बच गए।
इस संबंध में कार चालक के खिलाफ कुद पुलिस स्टेशन में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ आरपीसी की धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया। सरकारी वकील मीनाक्षी बुथयाल की दलीलें सुनने के बाद जज इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अभियोजन ने कहा कि कार चालक खतरनाक तरीके से वाहन चला रहा था।
उसकी कार की गति भी काफी तेज थी। जो मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है और आरपीसी की धारा 279 के तहत अपराध है, लेकिन ड्राइवर पर लगे आरोप शक के आधार पर ही तय किए गए हैं। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखती है।