कश्मीर में आतंक फैलाने वाले आतंकियों धन कीकमी महसूस हो रही है। ऐसे में पैसों के लिए अब आतंकी संगठन नारकोटिक्स का सहारा ले रहे हैं। वह सीमा पार से बड़े पैमाने पर ड्रग की तस्करी करवा रहे हैं।
साथ ही यहां के युवाओं को भी नशेड़ी बना रहे हैं। पीओक से मिले ताजा इनपुट में कहा गया है कि वहां आतंक की ट्रेनिंग के साथ नारकोटिक्स का भी बड़ा कारोबार चल रहा है। ऐसे में अब भारतीय सेना ने आतंकियों के साथ ही नारकोटिक्स तस्करी को भी राडार पर रख लिया है।
सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठनों के पास आतंकी गतिविधियों को चलाने और आतंकियों को तैयार करने के लिए पैसे की कमी पड़ रही है। हवाला और बैंक के जरिए होने वाले लेनदेन पर खुफिया एजेंसियों की कड़ी निगरानी की वजह से पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगनाओं ने ड्रग्स के जरिए स्थानीय स्तर पर ही आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्करों को धन उपलब्ध कराने के लिए यह रास्ता चुना है।
कमाई का बड़ा हिस्सा पहुंच रहा आतंकियों तक
आतंकवादी
हालांकि तमाम आतंकी संगठन पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशे के कारोबार से धन जुटाते रहे हैं। पंजाब के इंटरनेशनल बार्डर और जम्मू कश्मीर की एलओसी पर बैठे आतंकियों ने ओजीडब्लयू वर्कर और युवा आतंकियों को नारकोटिक्स की तस्करी के लिए तैयार किया है।
यह नेटवर्क सरहद से होकर पूरे देश में चल रहा है। जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल हैं। राजस्थान, पंजाब, केरल, जम्मू कश्मीर और मुंबई के तस्कर इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं।
सेना की 16 कार्प के जीओसी आरआर निंभोरकर का भी कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से देखेंगे। सूत्रों की मानें तो एलओसी पर सेना ने भी नारकोटिक्स की होने वाली सप्लाई पर नजर गड़ा दी है और इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।