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लेहः कंटेनमेंट जोन घोषित गांव में पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े, कई घायल, सात के खिलाफ एफआईआर

Sat, 16 May 2020 05:20 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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लेह - फोटो : अमर उजाला, फाइल
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लेह जिले में कंटेनमेंट जोन घोषित चुशोत योकमा क्षेत्र में लोगों और पुलिस में टकराव हो गया। यह लोग सील किए गए इलाके में सुविधाओं के अभाव और क्वारंटीन केंद्रों की व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस के रोकने पर मामला भड़क गया। इस दौरान लाठीचार्ज किया गया। गुरुवार की इस घटना में कुछ लोग घायल भी हो गए हैं। पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ पांच अलग-अलग धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं।

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जानकारी के अनुसार चुशोत योकमा गांव कंटेनमेंट जोन घोषित है। यहां सैकड़ों लोग दूसरे राज्यों से लौटे हैं जिन्हें क्वारंटीन केंद्रों में रखा गया था। इन लोगों का कहना था कि पहले तो क्वारंटीन केंद्राें में उनसे अत्यधिक पैसा लिया गया। कंटेनमेंट जोन के भीतर भी कई सुविधाएं नहीं दी जा रहीं।

इसे लेकर प्रशासन की अनदेखी पर वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान उन पर लाठीचार्ज कर दिया गया। वहीं घटना के बाद जिला उपायुक्त लेह सचिन कुमार वैश्य और एसएसपी लेह सरगुन शुक्ला ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में कहा कि कंटेनमेंट जोन के नियम कायदे किसी हाल में तोड़े नहीं जा सकते।
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प्रदर्शनकारी निर्माणाधीन चोगलामसर पुल पर आ गए थे, जिससे हादसा हो सकता था। जब इन्हें रोका गया तो कुछ शरारती तत्वों ने माहौल खराब कर दिया। कुछ लोगों को पुल पर पड़े सरिया, कील व अन्य सामग्री से चोटें आई हैं। सात लोगों पर आईपीसी की धारा 147, 188, 323, 336 और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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प्रशासन का तर्क

बाहर से आने वालों का सबसे पहले टेस्ट होता है। क्वारंटीन के लिए सबसे पहले रिश्तेदार के यहां रहने का विकल्प दिया जाता है। दूसरा विकल्प प्रशासनिक क्वारंटीन और तीसरा विकल्प निजी खर्चे पर होटल में ठहरने का दिया जाता है। कंटेनमेंट जोन के भीतर जाने पर किसी को बाहर आने की अनुमति नहीं होती। प्रदर्शन जैसी गतिविधि दूसरों की जान को खतरे में डाल सकती है।

लाठीचार्ज निंदनीय, जांच कराए प्रशासन
लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल लेह के अध्यक्ष ग्याल पी वांग्याल ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की निंदा की। वांग्याल ने कहा कि चुशोत योकमा के ग्रामीण अपनी समस्याओं के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन को लाठीचार्ज करने के बजाय संवाद से हल करना चाहिए था। इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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