बाल श्रमिकों के उत्थान के लिए जम्मू जिले में चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट अभी अधर में लटका है।
बाल श्रमिक पुनर्वास योजना का प्रस्ताव चार साल से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसे वर्ष 2010 में केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। अब हाल यह है कि जिले में होटल, ढाबों, चाय की दुकानों से लेकर बंगलों तक में चौदह साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाते देखा जा सकता है।
बाल श्रमिक कानून के अनुसार 14 साल के कम उम्र के बच्चों से काम करवाना अपराध की श्रेणी में आता है। जिले में बालश्रम को रोकने के लिए वर्ष 2009 में सर्वेक्षण करवाया गया था।
इसके बाद कवायद ठंडे बस्ते जाती रही। जिले में बाल श्रमिक अब भी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। समाज सेवकों का कहना है कि बाल श्रमिकों को लेकर जम्मू में श्रम विभाग गंभीरता से कदम नहीं उठा रहा है।
गौरतलब है कि श्रम विभाग की ओर से तीन जिलों में श्रीनगर, जम्मू, उधमपुर में चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट बनाने की योजना की मंजूरी मिली थी। फिलहाल, उधमपुर जिले में नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जिसके तहत 11 स्कूल संचालित हैं।
चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट उधमपुर के प्रभारी केके चौधरी का कहना है इन स्कूलों में 484 बच्चे पुनर्वास योजना के अंतर्गत पढ़ाई कर रहे हैं।