स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट इलेक्ट्रिसिटी सुधीर खजूरिया ने नौकरी के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी के आरोपी पुलवामा जिले के अवंतीपोरा के इशफाक अहमद वानी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता को रेशमघर कालोनी के अमरजीत सिंह ने बताया था कि उसका पार्टनर लोअर रूपनगर निवासी कुलदीप सिंह मनहास ने पुलिस विभाग में अपने एक परिचित को डीजीपी कोटा में भर्ती कराया है।
इसके लिए चार लाख रुपये दिए हैं। दो लाख रुपये एडवांस के तौर पर डीजीपी के पीए इशफाक अहमद वानी को दिए गए हैं। इस पर शिकायतकर्ता ने कुलदीप से मिलकर इशफाक से मुलाकात तय कराने के लिए कहा। कुलदीप उसे लेकर पुलिस लाइन गया, जहां कार्यालय से बाहर निकलकर इशफाक ने बताया कि डीजीपी कोटा में कुछ पद खाली है जिसका विज्ञापन नहीं होना है।
इसके लिए दो लाख रुपये लगेंगे। उसने यह भी आश्वस्त किया कि 15 दिन में लिस्ट जारी हो जाएगा। इस पर वह तथा उसके रियासी निवासी मित्र ओंकार सिंह ने दो-दो लाख रुपये इशफाक को कुलदीप सिंह के माध्यम से दिए। पैसा लेने के बाद न तो नियुक्ति हुई और न ही पैसा लौटाया गया। मामले की क्राइम ब्रांच से जांच में भी यह पाया गया कि दोनों चेक से पैसे दिए हैं। इशफाक को पांच मार्च और कुलदीप को 10 मार्च को गिरफ्तार किया गया। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।