सोलर आवास रोशनी योजना में लाखों रुपये के घोटाले के मामले में विजिलेंस ने कई विभागों के अधिकारियों के अलावा बंगलूरू की कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें एसएंडटी, पीएंडडी, पीडीडी, डीआईसी श्रीनगर, जेकेईडीए के अधिकारी शामिल हैं।
विजिलेंस के अनुसार सोलर आवास योजना की खरीद में भारी घोटाला हुआ और लाइटों का उपयोग वर्ष 2009-10 में नहीं किया गया। सत्यापन में खुलासा हुआ कि जेकेईडीए के अधिकारियों ने कुछ अनुमान क्षेत्रों के बिना बिजली वाले 68 दूरदराज गांवों के लिए संयुक्त राष्ट्र विद्युतीकरण कार्यक्रम के तहत बिना आवश्यकता के 12,367 एसएचएल खरीदने का प्रस्ताव रखा।
प्रोजेक्ट को छह माह में पूरा किया जाना था। 28 फरवरी 2009 को इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। दिसंबर 2009 को परियोजना पूरी करने की शर्त के साथ केंद्रीय वित्तीय सहायता का 70 फीसदी, यानी एक करोड़ (99,84,100 रुपये) जेकेईडीए को स्थानांतरित कर दिए गए।
खरीद समिति ने जानबूझकर बेईमानी व धोखे से 6,872 एसएचएल खरीदने के लिए बीईएल बंगलूरू के पक्ष में खरीद आर्डर जारी कर दिया। इसके लिए 13,993 रुपये प्रति यूनिट रेट तय किया गया, जबकि मार्केट में उससे सस्ते दर पर एसएचएल उपलब्ध था।
खरीद का फैसला लेने के लिए वित्तीय सलाहकार को शामिल भी नहीं किया गया। इस तरह सरकारी खजाने में 18,27,952 रुपये की चपत लगी। इतना ही नहीं, नए रेट कांट्रेक्ट लागू करने से एक सप्ताह पहले बेईमानी से खरीद आदेश को अंतिम रूप दिया गया ताकि बीईएल लिमिटेड को लाभ पहुंचाया जा सके।
इस तरह कुल 60.32 लाख रुपये की चपत सरकारी खजाने को लगी। तमाम आरोपी विभागों के अधिकारियों ने फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज कर लिया। मामले की जांच जारी है।