फर्जी गन लाइसेंस मामले में राज्य सरकार के आवेदन पर सीबीआई जल्द ही जांच शुरू करेगी। राजस्थान और जम्मू कश्मीर सरकारों ने इस संबंध में आवेदन दिया था। जम्मू कश्मीर से ही पिछले एक दशक के दौरान 4.29 लाख गन लाइसेंस जारी किए गए। इनमें सबसे ज्यादा फर्जी गन लाइसेंस उधमपुर, जम्मू, राजोरी, शोपियां, बांडीपोरा, कुपवाड़ा जिलों से जारी किए गए।
राज्य के गृह विभाग के सुरेश शर्मा ने अगस्त महीने में विजिलेंस द्वारा जुलाई महीने में शुरू की गई जांच और तीन एफआईआर का मामला सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे परंतु सीबीआई निदेशक के नई दिल्ली में मौजूद नहीं होने के कारण फैक्ट्री मालिक और फर्जी गन लाइसेंस जारी कराने वालों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हो पाया है।
अंतरराज्यीय रैकेट चल रहा
जम्मू के डीसी राजीव रंजन के भाई को गुडगांव से पकड़ने के बाद राजस्थान के पुलिस महानिदेशक ओपी गल्होत्रा ने केस को सीबीआई को केस रेफर करने की सिफारिश की थी। जम्मू कश्मीर पुलिस ने भी कई मामले दर्ज किए हैं। सीबीआई का सुरजीत सिंह राना बनाम सीबीआई का केस काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें जम्मू के चार एडीसी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में भी चंडीगढ़ कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
आपरेशन जुबैदा के बाद हुआ खुलासा
राजस्थान में आपरेशन जुबैदा के बाद गुडगांव, जयपुर और अन्य राज्यों में छापे मारे गए। राजस्थान एटीएस ने जम्मू कश्मीर सरकार से भी कहा था कि राज्य के कुछ डीसी और जम्मू के डीसी से पूछताछ करनी है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने मामला विजिलेंस को सौंप दिया। विजिलेंस ने तीन मामले दर्ज किए। इन मामलों के दर्ज करने के बाद उधमपुर, शोपियां, जम्मू, बारामुला सेे रिकार्ड सीज किया गया। बाकी का रिकार्ड भी राज्य गृह सचिव सुरेश कुमार ने तलब किया।
कश्मीर से 4,29 हजार लाइसेंस हुए जारी
राज्य से पिछले एक दशक से 4,29 हजार लाइसेंस जारी हुए। राज्य से 1,43,013 लाइसेंस में से 1,32,321 लाइसेंस डोडा, रामबन, उधमपुर और जम्मू जिले से जारी किए गए हैं। जबकि सबसे अधिक रैकेट कश्मीर से चल रहा है। बारामुला, राजोरी, शोपियां, कुपवाड़ा, करगिल से भी फर्जी गन लाइसेंस जारी हुए। मामला सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की गई। राज्य गृह विभाग भी इस मामले को लेकर गंभीर है।
सुरक्षा जवानों को दिए जाते हैं लाइसेंस
जम्मू कश्मीर में तैनात विभिन्न सुरक्षा बलों के जवानों को लाइसेंस दिए जाते हैं। इन लाइसेंस को हासिल करके जवान रिटायर्डमेंट के बाद किसी भी सुरक्षा एजेंसी में काम कर सकते हैं। कुछ फैक्ट्री मालिकों व उनसे संबंधित एजेंट फर्जी मोहरें व डीसी के हस्ताक्षर करके जवानों को भी चूना लगा देते हैं। कई बार डीसी अपने अधिकारों को उपयोग करके एक-दो गन लाइसेंस जारी कर देता है, लेकिन ज्यूडिशयल क्लर्क और अन्य एजेंट फर्जीवाड़ा कर देते हैं।