श्रीनगर। हिजबुल कमांडर और घाटी में आतंकियों के पोस्टर बॉय रहे बुरहान वानी की दूसरी बरसी से पूर्व अलगाववादियों पर शिकंजा कस दिया गया है। हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक और जेकेएलएफ के चेयरमैन यासीन मलिक को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया। सैयद आली शाह गिलानी तो पहले से ही नजरबंद हैं।
दरअसल, कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने हिजबुल कमांडर रहे बुरहान वानी की दूसरी बरसी के मौके पर 8 जुलाई रविवार को कश्मीर बंद का आह्वान किया गया है। अलगाववादी संगठन केजेआरएल ने बंद में लोगों से सहयोग देने की अपील की है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही अलगाववादियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को पुलिस ने हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज मोलवी उमर फारूक को उनके निगीन स्थित घर पर ही नजरबंद कर दिया गया। उनके प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस का एक दल उनके घर के बाहर पहुंचा और उन्हें नजरबंद करने की जानकारी दी। उन्हें जुमे की निमाज के लिए जामिया मस्जिद भी नहीं जाने दिया गया। इस बीच नौहट्टा इलाके में स्थित जामिया मस्जिद को भी प्रशासन द्वारा ताला लगाया गया था। जुमे की निमाज वहां पढ़ने नहीं दी गई। नौहट्टा के अलावा श्रीनगर के पुराने शहर के कई इलाकों में पाबंदियां लागू की गई थी, ताकि जुमे की नमाज के बाद होने प्रदर्शनों पर रोक लगाई जा सके।
इसके अलावा जेकेएलएफ के चेयरमैन यासीन मलिक को भी माईसुमा स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें कोठीबाग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। हुर्रियत (जी) के अध्यक्ष सैयद आली शाह गिलानी तो पहले से ही नजरबंद हैं। जबकि अन्य कई अलगाववादियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि कोई बुरहान की बरसी पर किसी प्रकार की रैली का आयोजन नहीं कर सके।
आतंकियों के समूह ने दी बुरहान को दी गन सैल्यूट
बताया जाता है कि आतंकियों ने पूर्व हिज्ब कमांडर बुरहान वानी को दूसरी बरसी के मौके पर शुक्रवार को गन सैल्यूट दिया गया। पांच आतंकियों का एक समूह त्राल में ईदगाह पहुंचा, जहां बुरहान को दफनाया गया था और वहां हवा में कुछ राउंड फायर किए और तुरंत वहां से वे निकल गए। बुरहान वानी 8 जुलाई, 2016 को अनंतनाग के कुकरनाग इलाके के बमडूरा गांव में मुठभेड़ के दौरान दो साथियों के साथ मारा गया था। उसके मारे जाने के बाद कई महीनों तक घाटी के हालात बिगड़े रहे थे।