सांबा। बार्डर मार्ग पर राजपुरा के पास नाले में आई बाढ़ में सवारियों से भरी मिनी बस फंस गई। चालक की सूझबूझ से सभी दस यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई। गनीमत रही कि तेज बहाव में मिनी बस पलटी नहीं।
जिला मुख्यालय को बार्डर के गांवों को जोड़ने वाले अहम मार्ग पर राजपुरा के नजदीक नाला पड़ता है। इस नाले पर बना पुल 17 साल पहले टूट गया था। वर्तमान में यहां पुल जैसा कुछ भी नहीं बचा है। ऐसे में पैदल यात्रियों समेत सभी तरह के वाहनों को नाले में होकर गुजरना पड़ता है। सांबा से यह मार्ग वाया राजपुरा होते हुए कठुआ जिले तक सीमावर्ती गांवों को जोड़ता है।
शनिवार की सुबह मिनी बस दस सवारियों को लेकर राजपुरा से सांबा की ओर आ रही थी। जिले के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश हुई है। ऐसे में नाले का जलस्तर बढ़ रहा था। चालक ने उस पार जाने के लिए मिनी बस को नाले में उतार दी। चालक को अंदाजा था कि पानी इतना ही है कि नाले को आसानी से पार किया जा सकता है। लेकिन जैसे ही मिनी बस ने नाले के कुछ हिस्से को पार किया तो चालक ने देखा कि पानी का बहाव अचानक से तेजी से उसकी ओर बढ़ रहा है। ऐसे में उसने तत्परता दिखाते हुए बस को रोक दिया और सवारियों को आननफानन में उतरकर सुरक्षित जगह जाने को कहा। देखते ही देखते पानी के तेज बहाव में मिनी बस पूरी तरह फंस गई।
बार्डर मार्ग पर आवाजाही बंद
बार्डर मार्ग पर नाले में बाढ़ के चलते आवाजाही बंद हो गई है। देर शाम तक जलस्तर कम नहीं हुआ था। मिनी बस नाले में ही फंसी थी। नाले का जलस्तर कम होने का इंतजार किया जा रहा है।
17 साल में क्यों नहीं बन पाया पुल
घटना के बाद स्थानीय लोगों और सवारियों ने ग्रेफ विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 17 साल पहले यहां पुल था जो टूट गया था। तब से अब तक यहां नया पुल बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। यह घोर उपेक्षा है। बार्डर एरिया के लोग जान जोखिम में डालकर नाला पार करते हैं। हर बारिश में यही होता है। पूर्व सरपंच भारत इंदु शर्मा ने बताया कि वह इस संबंध में डीसी सुषमा चौहान से मुलाकात कर समस्या बताई जाएगी।