एसीबी ने की कार्रवाई, महाराष्ट्र की फर्म से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का किया गया गबन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भ्रष्टाचार और अवैध नियुक्ति मामले में जम्मू-कश्मीर स्टेट हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंधक निदेशक राकेश शर्मा पर दो मामले दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि जेएंडके स्टेट हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को सांबा परियोजना के लिए हैंडलूम मशीनरी की खरीद के लिए 6 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा ने निर्माताओं से भारी कमीशन के बदले एयरजेट लूम खरीदे, जो हैंडलूम की श्रेणी में नहीं आते हैं।
एफआईआर दर्ज करने पर जब मामले की जांच की गई। पता चला कि स्टेट हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सांबा परियोजना के लिए 10 करघों की खरीद के लिए एनआईटी जारी की थी। एनआईटी के जवाब में पांच अलग-अलग फर्मों ने भाग लिया। इसमें एएआर एंटरप्राइजेज, पानीपत को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी घोषित किया गया, जिसकी प्रस्तावित बोली 12.25 लाख थी। जीएसटी प्रति करघा एक समान दर पर थी। हालांकि सबसे कम बोली लगाने वाले को आर्डर देने की बजाय श्री टेक्स इंजीनियर्स, महाराष्ट्र से छह करघे खुले बाजार से खरीदे, जिनकी लागत 96.80 लाख थी। स्टेट हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों/कर्मचारियों ने मेसर्स श्री टेक्स इंजीनियर्स के मालिकों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश के तहत अपने पद का दुरुपयोग करके बेईमानी और धोखाधड़ी से अपने आर्थिक लाभ के लिए निविदा प्रक्रिया को बीच में ही रद्द कर दिया। श्री टेक्स इंजीनियर्स से अत्यधिक दरों पर करघे खरीदे। जिससे खुद को और फर्म के मालिकों को अनुचित लाभ हुआ और राज्य के खजाने को नुकसान हुआ।
अवैध नियुक्तियां और पदोन्नतियां की
वहीं, दूसरे मामले में दर्ज एफआईआर की जांच में पता चला कि राकेश शर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग करके बिना विज्ञापन 14 कर्मियों की नियुक्ति की। शर्मा ने जेके स्टेट हैंडलूम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मनमाने ढंग से ग्रेड प्रदान करके निगम के कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर पदोन्नति की। डीपीसी की सिफारिश पर निगम द्वारा 58 अधिकारियों व कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया। हालांकि, डीपीसी की सिफारिशों के बिना और रिक्त पदों की स्थिति का अवलोकन किए बिना। तत्कालीन प्रबंध निदेशक राकेश शर्मा द्वारा 137 और पदोन्नतियां भी की गईं। कुछ पदोन्नतियां उन कर्मचारियों के पक्ष में की गईं, जिन्होंने पद पर 3 साल की पूर्व-अपेक्षित अवधि पूरी नहीं की थी, जबकि निगम की स्वीकृत संख्या से अधिक पदोन्नतियां की गईं। इस प्रकार उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और लाभार्थी कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया।