श्रीनगर। दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग का गर्भ गिराने की याचिका पर हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से जांच कराने के बाद निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी ने कहा कि दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग 23 सप्ताह की गर्भवती है। अक्तूबर अंत तक गर्भ 24 सप्ताह का हो जाएगा। बिना देरी किए रेडियोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सक समेत अन्य डॉक्टरों का बोर्ड नाबालिग का चेपअप करें। इसके बाद वे पीड़ित का गर्भ गिराने और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने संबंधी अपनी राय से रिपोर्ट के जरिये कोर्ट को अवगत कराएं।
कोर्ट ने कहा कि यदि डॉक्टरों का बोर्ड गर्भ गिराने की अनुशंसा करता है तो पीड़ित के उपचार और देखभाल की भी पूरी व्यवस्था निशुल्क की जाएगी। इस नाबालिग का बीते वर्ष नवंबर माह में अपहरण हो गया था। परिवार के सदस्यों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में आईपीसी की धारा 363, 366-ए, 109 और प्रीवेंशन ऑफ चिलड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ओफेंस अधिनियम 2012 के तहत मामला दर्ज किया गया। 16 अक्तूबर को अल्ट्रासाउंड टेस्ट में दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग 22 सप्ताह की गर्भवती पाई गई। अभिभावकों ने पीड़ित के स्वास्थ्य और सामाजिक कलंक के पहलुओं को देखते हुए स्थानीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में गर्भ गिराने की गुहार लगाई। गर्भ गिराने से इन्कार करने पर अभिभावकों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित के वकील ने कोर्ट में कहा है कि गर्भावस्था से नाबालिग की जान को खतरा है। उसके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात होने की आशंका है।