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सिर्फ आशंका के आधार पर आपराधिक जांच नहीं रोकी जा सकती : हाईकोर्ट

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आशंका के आधार पर आपराधिक जांच नहीं रोकी जा सकती कि जांच एजेंसी किसी व्यक्ति को मामले में आरोपी बना सकती है। अदालत ने कहा कि जांच के इस चरण में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ कोर्ट ने 2017 में दर्ज क्राइम ब्रांच की एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति शहजाद अजीम ने यह फैसला गुलाम मोहम्मद शेख की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने श्रीनगर के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 34/2017 को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का नाम एफआईआर में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है। उसकी आपत्ति केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41-ए के तहत जारी नोटिस को लेकर थी। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर जांच पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पहले भी इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट पहुंच चुका है और वह मामला अभी लंबित है। ऐसे में समान राहत के लिए दूसरी याचिका दायर करना उचित नहीं है। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद ह्यू एंड क्राई नोटिस का भी जिक्र किया और कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करने के बजाय फरार रहा। इसके बाद उसने उस एफआईआर को रद्द करने की मांग की, जिसमें उसका नाम आरोपी के रूप में भी दर्ज नहीं है। जेएनएफ
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