जम्मू। दुष्कर्म के एक मामले में निचली अदालत की तरफ से सुनाई गई सजा के आदेश को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय धर ने शुक्रवार को रद्द कर दिया। आरोपी नरेश कुमार को 24 जनवरी 2024 को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह स्पष्ट है कि पीड़िता के बयान आपस में मेल नहीं खाते। पिछली बार कुछ और बयान थे और अबकी बार कुछ और हैं।
एक बयान में पीड़िता ने कहा कि उसे कार में बिठाया। कोल्ड ड्रिंक में नशा दिया गया और वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो खुद को राजस्थान में पाया। दूसरा बयान यह है कि उसकी आरोपी से पहले जान पहचान थी। पहले वह उसके साथ बस में गई और फिर ट्रेन में गई।
निचली अदालत ने अपीलकर्ता को दोषी ठहराते समय मामले के उपरोक्त किसी भी पहलू पर ध्यान नहीं दिया है। पीड़ित को अपीलकर्ता की हिरासत से बरामद किया गया था, किसी भी साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं है। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विश्लेषण किया है, उसमें बहुत कुछ अपेक्षित नहीं है। अभियोजन पक्ष की गवाही को साक्ष्य के स्थापित सिद्धांतों की कसौटी पर परखे बिना उसी पर भरोसा करने के लिए आगे बढ़ा दिया है। लिहाजा आरोपी को सुनाई गई सजा को रद्द किया जाता है।