जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अस्थायी कर्मचारियों को सिर्फ जरूरत के आधार पर ही रखा जा सकता है, उन्हें नियमितीकरण का कोई अधिकार नहीं है। यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अतुल श्रीधरन और मोक्षा खजूरिया काजमी वाली खंडपीठ ने की।
याचिकाकर्ताओं का मामला यह है कि वर्ष 2014 में सरकारी आदेश के तहत स्वास्थ्य विभाग में कई उप केंद्रों को अपग्रेड किया गया था और साथ ही इनमें पद भी जारी किए गए थे। इसमें नर्सिंग अर्दली के 1284 आकस्मिक श्रमिकों को काम पर रखने की बात थी। याचिकाकर्ता मुख्य चिकित्सा अधिकारी गांदरबल द्वारा जारी विभिन्न नियुक्ति आदेशों के माध्यम से 2014-15 में विभाग में आकस्मिक श्रमिकों के रूप में नियुक्त हुए। याचिकाकर्ताओं द्वारा यह तर्क दिया गया है कि नियुक्ति आदेशों के अनुसार, उन्होंने उन्हें सौंपे गए कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाया। ऐसे में उसकी सेवाओं को नियमित करना प्रतिवादियों का संवैधानिक दायित्व है क्योंकि वे लगातार आकस्मिक श्रमिकों के रूप में काम कर रहे हैं। खंडपीठ ने ने रिट कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए, अपील को खारिज कर दिया। हालांकि उत्तरदाताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया कि अपीलकर्ताओं की वैध रूप से अर्जित मजदूरी उस अवधि के लिए जारी की जाए जिसके लिए उन्होंने वास्तव में काम किया है। जेएनएफ