- यह महत्वपूर्ण आदेश मचैल माता के भक्तों की ओर से दायर मुकदमे में पारित किया गया
- 2018 में मचैल माता का प्रबंधन जम्मू-कश्मीर के मंदिर बोर्ड में से एक को सौंपने का निर्देश दिया था
- मंदिर प्रबंधन को लेकर जारी विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित
जम्मू। उप रजिस्ट्रार जम्मू शबनम शेख सर्व शक्ति सेवक संस्थान के पुन: पंजीकरण प्रमाणपत्र के संचालन को स्थगित रखने का आदेश दिया है। श्री मचैल माता मंदिर के भक्तों की तरफ से राजकुमार गुप्ता की दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया गया। गुप्ता ने सर्वशक्ति सेवक संस्थान किश्तवाड़ के पंजीकरण संख्या 669-सीएसए 21 जून को रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी व फर्म जम्मू द्वारा पंजीकृत पुन: पंजीकरण प्रमाणपत्र को शून्य घोषित करने की याचिका दायर की थी।
मामले का तथ्य यह है कि अपीलकर्ता माता मचैल का भक्त है, जिसे अन्य भक्तों ने प्रस्ताव पारित कर केस दायर करने के लिए अधिकृत किया। अपीलकर्ता और अन्य भक्त मचैल माता के प्रबंधन के सुचारू संचालन में भाग लेते और योगदान करते थे। मंदिर का प्रबंधन सर्वशक्ति सेवक संस्था की ओर से किया जाता था, लेकिन संस्था द्वारा वित्तीय धांधली करने पर केस दर्ज करते हुए संस्था से प्रबंधन के अधिकार छीन लिए गए। उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर की गई है। उच्च न्यायालय ने 2018 में सरकार को मचैल माता मंदिर के संपूर्ण प्रबंधन को प्रदेश के मौजूदा मंदिर बोर्ड में से एक को सौंपने का निर्देश दिया था। इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। यह अभी भी निर्णय के लिए लंबित है, लेकिन प्रतिवादी पक्ष ने फर्जी तरीके से पुन: पंजीकरण के लिए रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज जम्मू से संपर्क किया और तथ्यों को छिपाकर 21 जून 2024 को उपरोक्त संस्था का पुन: पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया। दलीलें सुनने के बाद सब रजिस्ट्रार जम्मू शबनम शेख ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अपीलकर्ता के पक्ष में मामला है। मामला आकस्मिक प्रकृति का प्रतीत होता है, इसलिए धारा 39 नियम 3 सीपीसी के तहत गैर-आवेदक व प्रतिवादी को पूर्व सूचना देने से छूट दी जाती है और दूसरे पक्ष को उपस्थित होने और आपत्तियां दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया जाता है। इस बीच दूसरे पक्ष की आपत्तियों के अधीन पुन: पंजीकरण प्रमाणपत्र के संचालन को अगली सुनवाई की तारीख तक स्थगित रखा जाता है। जेएनएफ