जम्मू। सेवानिवृत्त शिक्षक का वेतन रोकने पर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। निर्देश दिया है कि शिक्षक का बकाया और पेंशन लाभ बिना किसी और देरी के जारी किए जाएं। मनोहर लाल की याचिका पर सरकार ने तर्क दिया था कि वे मुख्य शिक्षा अधिकारी उधमपुर के साथ अपने अटैचमेंट के दौरान कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए थे। जिस वजह से उनका बकाया रोका गया। बुधवार न्यायाधीश संजीव कुमार एवं संजय परिहार की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश के खिलाफ सरकार की याचिका खारिज कर दी। जिसमें सेवानिवृत्त मास्टर मनोहर लाल के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। कैट ने पहले अधिकारियों को जनवरी 2015 से मार्च 2016 तक की अवधि को ड्यूटी अवधि मानने और उन 14 महीनों का वेतन जारी करने के साथ-साथ अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन की पुनर्गणना करने का निर्देश दिया था। जेएनएफ