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किसानों को सीधे दिया जाए जमीन का मुआवजा

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सांबा। अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने मंगलवार को जाट समुदाय को मजबूत करने के लिए महिलाओं से समर्थन मांगा। इस संबंध में महासभा के सदस्यों ने रामगढ़ तहसील के रंगूर गांव का दौरा किया, और समस्याओं का जायजा लिया। इस दौरान सरकार से मांग की गई कि 1965 और 1971 के विस्थापितों को आवंटित कस्टोडियन भूमि के स्वामित्व अधिकारों से वंचित होने के परिणामस्वरूप, जाट किसान मुआवजे से वंचित हैं, उन्हें सीधे मुआवजा दिया जाए।
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बैठक सरपंच काली दास की अध्यक्षता में हुई। इसमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। मनमोहन सिंह ने कहा कि 1947, 1965 और 1971 के युद्धों के बाद जाट समुदाय के सदस्यों को शीर्ष मामलों में बैठे अधिकारियों के कठोर रवैये के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने पूरे जाट समुदाय विशेष रूप से महिलाओं का समर्थन मांगा। कहा कि मातृ शक्ति के समर्थन के बिना समुदाय के मुद्दों को हल करना असंभव है। उन्होंने अन्य राज्यों की तर्ज पर जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यह हमारा अधिकार है, और जाटों को उनका हक मिलने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
मनमोहन सिंह ने महिलाओं से भी नौ अक्टूबर को गंग्याल, जम्मू में होने वाले महासभा के सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का अनुरोध किया।
बैठक में इस बात पर प्रकाश डाला कि अगस्त 2016 की बाढ़ ने उनकी कृषि भूमि को बहा दिया, जिसके कारण वे खेती नहीं कर पा रहे। खेत में करीब 5 से 6 फीट तक गंदगी जमा हो गई। उक्त भूमि अभी भी उसी स्थिति में है। वह गंदगी जमा होने के कारण इसे खेती योग्य नहीं बना पाए हैं। साथ ही उनके खेतों में लगे पानी के पंप भी बह गए और उन्हें आज तक सरकार से एक पैसा नहीं मिला। उन्होंने बिजली विभाग द्वारा उन किसानों को भेजे गए बिलों पर भी गंभीर चिंता जताई, जिनकी कृषि भूमि 2016 की बाढ़ में बह गई। मनमोहन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया कि लगभग छह साल बीतने के बाद समुदाय खेती नहीं कर पा रहा है, और उनसे बिजली बिल मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विस्थापन के बाद छंब सेक्टर में छोड़ी गई भूमि के बदले 1965 और 1971 के विस्थापितों को आवंटित कस्टोडियन भूमि के स्वामित्व अधिकारों से वंचित होने के परिणामस्वरूप, जाट किसान सरकार से मुआवजे से वंचित हो गए।
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बैठक में ब्रिगेडियर पवन सौंत्रा, सरपंच काली दास, विजय चौधरी, रशपाल चौधरी, सुरजीत चौधरी, यशपाल, सुरैन सिंह और युवा नेता सुरिंदर चौधरी मौजूद रहे।
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