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Jammu News: स्वच्छता सर्वेक्षण अगले माह, नहीं जागे तो इस बार लुढ़केगी रैंकिंग

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- जमीनी हकीकत : अभी भी खुले मे फेंका जा रहा कचरा, नाले गंदगी से भरे, नालियां जाम
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- बीते साल दो अंक वाली रैंकिंग पर पहुंचाने के प्रयास रहे थे विफल, 199 से 248वां स्थान मिला
- नाले और नालियों ने बिगाड़ा था खेल, मौजूदा समय में बहुत कुछ करना बाकी
सतीश वालिया
जम्मू। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के लिए आगामी माह शुरू होने वाला है। इसके लिए दिल्ली से टीम पहुंचेगी और रैंकिंग के लिए सर्वे शुरू होगा। इसकी रिपोर्ट को विभाग को सौंपी जानी है। बीते साल रैंकिंग 199 से लुढ़क कर 248 पहुंचने के बाद नगर निगम ने सुधार के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण द्वारा निर्धारित पैरामीटर पर काम करने और रैंकिंग में सुधार का दावा किया है। मगर, धरातल पर इस बार भी स्थिति विपरीत है।
यह हैंं सात पैरामीटर
1. डोर-टू डोर कचरा प्रबंधन :
शहर में डोर-टू डोर कचरा प्रबंधन शत-प्रतिशत होना चाहिए। मगर मौजूदा समय में 80 फीसदी घर ही डोर टू डोर से योजना से जुड़ पाए हैं। कचरा खुली जगहों में फेंका जा रहा है।
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2. ठोस कचरा निपटान प्रबंधन :
हकीकत यह है कि कोटभलवाल में कचरा संयंत्र केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। काम आधा ही हो पाया है। पैरामीटर पर खरा उतरने के लिए नगर निगम के पास अपना कचरा संयंत्र केंद्र होना जरूरी है जहां पर कचरे का निस्तारण हो सके।
3. व्यक्तिगत शौचालय :
व्यक्तिगत शौचालय शहर में शत प्रतिशत होने जरूरी हैं मगर शहर की अधिकांश निजी कालोनियां में शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। लोगों को इसके लिए परेशान होता भी देखा जा सकता है। इस पर नगर निगम को काम करने की जरूरत है।
4. स्वच्छता प्रचार :
इसके लिए कचरा एकत्रित करने वाले ऑटो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके अलावा बड़े स्तर पर लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक करने को लेकर नगर निगम कोई भी बड़ा अभियान नहीं चला पाया है।
5. नदियों का पानी साफ हो :
शहर के नालों का पानी नदी में गिरता है। इन नालों को डायवर्ट करने पर योजना पर काम हो रहा है। नाले और नालियों की हालत भी खराब है। नालियों में सीवरेज की गंदगी गिरती है। कई-कई दिन इनकी सफाई नहीं होती।
6. पॉलीथिन पर पाबंदी :
प्रतिबंध के बावजूद शहर में पॉलीथिन का धड़ेल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। खाने से लेकर दूध व अन्य सामान आज भी पाॅलीथिन में पैक किया जा रहा है। हालांकि नगर निगम की टीम जुर्माना करती है, इसके बावजूद यह कहना गलत नहीं होगा कि पॉलीथिन का प्रयोग बंद नही हो पाया है।
7.
खुले में कचरा ना फेंकना :
शहर में आज भी कई इलाकों में खुले में कचरा फेंका जा रहा है। इसके लिए जगह-जगह कूड़ेदान की व्यवस्था होनी चाहिए। वैसे तो शहर के नागरिकों का भी यह फर्ज बनता है कि वे अपने शहर को स्वच्छ रखें और खुले में सड़क किनारे कूड़ा फेंकने से परहेज करें। इन्ही सात पैरामीटर में पिछड़ने के कारण हम हर बार रैंकिंग में पीछे रह जाते हैं।
नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि इन पैरामीटर पर काम हो रहा है। इस बार रैंकिंग में सुधार होगा। खुले में कचरा न फेंकने पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा डंपिंग साइट को बंद किया जा रहा है। नाले और नालियों की सफाई की जा रही है। लोगों को कचरा नालों में न फेंकने को कहा जा रहा है।
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किस वर्ष, कितनी रही रैकिंग

स्वच्छता सर्वेक्षण में जम्मू की वर्ष 2022 में 199, 2021 में 169, 2020 में 224 जबकि 2019 में जम्मू 329वीं रैंकिंग रही थी।


रैंकिंग सुधार पर हुआ है काम
पूर्व मेयर चंद्र मोहन गुप्ता ने कहा कि शहर में नगर निगम के गठन के बाद रैंकिंग में सुधार पर काम किया गया है। उनके कार्यकाल में रैंकिंग 329 से 199 तक पहुंची थी। पूर्व डिप्टी मेयर बलदेव सिंह बलोरिया ने कहा कि स्वच्छता पर काम 2018 से चल रहा है। वह हेल्थ एंड सेनिटेशन कमेटी के चेयरमैन रहते हुए नाले, नालियों और अन्य सात पैरामीटर पर काम करवाया है।


कोट

स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए टीम अगले माह आएगी। इस बार रैंकिंग में सुधार के लिए कई प्रोजेक्टों में काम करवाया जा रहा है। उम्मीद है कि रैकिंग सुधरेगी।
- डा. विनोद शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

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