अखनूर। सीटू से संबद्ध बॉर्डर रोड्स कैजुअल पेड वर्कर्स यूनियन जेएंडके का राज्य सम्मेलन रविवार को आयोजित किया गया। सम्मेलन से पहले कार्यकर्ताओं ने निर्दोष चौक अखनूर से दसकाल तक रैली निकाली। रैली का प्रतिनिधित्व राज्य सीटू के अध्यक्ष एम.वाई तारिगामी और दिल्ली से आए हुए अन्य केंद्रीय नेताओं ने किया।
तारिगामी ने कहा कि देश में नई आर्थिक नीतियों के आने के बाद से श्रमिकों के अधिकारों पर हमले बढ़ रहे हैं। पिछले दस वर्षों के दौरान कई बार हड़तालें हुईं जिनमें करोड़ों श्रमिकों ने भाग लिया। मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपनी नीतियों को वापस नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों के कड़े विरोध के बावजूद सरकार ने श्रम संहिताएं पारित कीं, जिनमें से तीन तो तब हुईं जब पूरा विपक्ष संसद में अनुपस्थित था। उन्होंने कहा कि यह सरकार ट्रेड यूनियनों के साथ श्रमिकों के मुद्दों को सुनने और चर्चा करने के लिए भी तैयार नहीं है। उन्होंने मजदूर वर्ग से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन के अखिल भारतीय सचिव कॉमरेड डॉ. कश्मीर सिंह ने केंद्र सरकार के खुले संरक्षण में आरएसएस और उसके विभिन्न संगठनों द्वारा फैलाए जा रहे कट्टर सांप्रदायिक जहर पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कहा कि इसका उद्देश्य श्रमिकों को विभाजित करना है। सीटू की राज्य समिति के महासचिव कॉमरेड जगदीश शर्मा ने कहा कि सीमा सड़क संगठन के कैजुअल वेतनभोगी कर्मचारी हमारे श्रमिक वर्ग का सबसे कमजोर वर्ग हैं, क्योंकि उनके लिए ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि जैसी कोई सामाजिक सुरक्षा योजना नहीं है। उन्हें भारत-पाक सीमा पर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। यूनियन लगातार ईपीएफ लागू करने के लिए बीआरओ प्रबंधन पर दबाव बना रही है, जिसके लिए क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त जम्मू ने सीपीएल श्रमिकों के लिए ईपीएफ लागू करने के लिए प्रबंधन को पत्र लिखा है।