सूर्य उपासना के अनुपम लोकपर्व छठ का शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ आगाज हो गया। पर्व को लेकर आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जहां शनिवार से रौनक दिखना शुरू हो जाएगी। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुए इस पूजन में औद्योगिक क्षेत्र से सटे इलाके में छठ पूजन का कार्य विधिवत पूरा किया जाएगा।
चार दिन चलने वाले इस महोत्सव में आस्था से जुड़े सैकड़ों लोग सूर्य उपासना का अनुपम लोक पर्व मनाएंगे। शुक्रवार को एक ओर जहां कठुआ नहर के किनारे पूजा स्थल को सजाने का काम चलता रहा। वहीं, घरों में महिलाओं ने नहाय खाय की प्रक्रिया को पूरा किया।
व्रत रखने वालों के लिए विशेषतौर पर कद्दू भात बनाया जाता है। शनिवार को छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होगा। इसके बाद रविवार शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। रात भर बनाई गई देहरियों के किनारे पूजन और संकीर्तन होगा, जिसके बाद सोमवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ लोक पर्व संपन्न होगा।
गौरतलब है कि औद्योगिक इकाइयों और अन्य संस्थानों में रोजगार के लिए बीते डेढ़ दशक में देशभर से बड़ी संख्या में लोग कठुआ में अस्थायी रूप से आ बसे हैं। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई वाले इलाकों में प्रचलित इस त्योहार की परंपराओं के निर्वाह के साथ ही उन प्रदेशों की संस्कृति ने जिले पर भी अपनी छाप बनाई है।
छठ पूजन पर सूर्य उपासना के लिए तैयारियों में जुटी महिला श्रद्धालु सुनीता, पूनम, नियती, निशा, रोशनी आदि ने बताया कि धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। भैया दूज के बाद शुरू होने वाले इस त्योहार को लेकर उनके क्षेत्र के लोग परंपरा का निर्वाह करते हुए सूर्य उपासना करते हैं।
उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया जाता है। महिलाओं ने बताया कि हिंदू मान्यताओं में सूर्य देव और छठ मइया का संबंध भाई बहन का है और ऐसे में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है।