जम्मू। चल गइया, बो काटेया। रोमांच, उत्साह और जोश। न धूप की प्रवाह और न उमस से परेशानी। रविवार को कुछ ऐसा ही नजारा मंदिरों के शहर में दिखेगा। भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन पर पूरा शहर पतंगबाजी में डूबा रहेगा। क्या बच्चे क्या बड़े हर कोई छतों पर रहकर पतंगबाजी का मजा लेंगे। छतों पर डीजे की धुनों पर युवा जमकर थिरकेंगे। शाम को आतिशबाजी और आग के गुब्बारे उड़ाकर जोश दिखाया जाएगा। रक्षाबंधन के बाद जन्माष्टमी पर भी पतंगबाजी का दौर रहेगा।
पतंगबाजी के शौकीनों ने पतंगबाजी के लिए ढेर सारी तैयारियां कर रखी हैं। पिछले कई हफ्तों से मौसम साफ चल रहा है, जिससे रविवार को भी मौसम पतंगबाजों के पक्ष में ही रहने की उम्मीद है। शनिवार बाजारों में जमकर पतंगों और डोर की खरीदारी की गई। शहर के पक्का डंगा, दीवान मंदिर आदि बाजारों में सुबह से शुरू हुआ खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। इस खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं के पहुंचने से बाजारों में जाम की स्थिति रही। बच्चों और युवाओं ने छोटी पतंगों से लेकर छह फुट तक विशाल पतंगों की खरीदारी की। इन विशाल पतंगों को विशेष ऑर्डर पर बनवाया गया है। जिन पर कई पतंगबाजों ने अपना नाम लिखवाया है। छतों से प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटने पर पूरे जोश के साथ उसे हार का अहसास करवाया जाता है। इसमें छतों पर मौजूद कई युवा एक साथ पारंपरिक चल गइया, बो काटेया के बोल बोलते हैं। पतंगबाजी के दौरान मनोरंजन की भी पूरी व्यवस्था रहेगी। इसमें अधिकांश छतों पर डीजे और अन्य दूसरे साउंड सिस्टम लगाकर गाना बजाना किया जाता है। पतंगबाजी में युवकों के साथ युवतियां भी आगे रहती हैं। कई छतों से युवतियों को पतंगबाजी करते देखा जा सकता है। बाजार में कागज की पतंग 5 रुपये से लेकर 200 या इससे अधिक की कीमत में उपलब्ध रही। इसी तरह प्लास्टिक (मोमी कागज) की पतंग 5 से लेकर 25 या 30 रुपये तक उपलब्ध है। हालांकि पारंपरिक पतंगों में पतंगबाजी के शौकीनों के लिए दरवाज गुड्डा, भूत, अख्खादार, दिलदार आदि पहली पसंद रहे।
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गट्टू डोर की ब्लैक मार्केटिंग
जिला प्रशासन की ओर से चाइनीज नायलन (गट्टू) की डोर पर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में जमकर इसकी ब्लैक मार्केटिंग हुई है। रविवार भी अधिकांश छतों से गट्टू डोर का ही प्रयोग होता दिखेगा। हर साल गट्टू डोर के कारण बड़ी संख्या में राहगीर और वाहन चालक घायल हो जाते हैं। गट्टू डोर शरीर के विभिन्न हिस्सों में फंस जाने पर आसानी से टूटती नहीं है और यह उस हिस्से को काट देती है। इसमें शरीर के मुंह और गले वाले हिस्से पर अधिक खतरा रहता है।
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