10,000 आबादी को अरनिया कस्बे से शॉर्टकट जोड़ने वाला इकलौता पुल बनेगा चुनावी मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अरनिया कस्बे से 15 गांव को जोड़ने वाला लोहे का क्षतिग्रस्त पुल चुनाव में अहम मुद्दा बन सकता है। करीब 10,000 आबादी को अरनिया कस्बे से शॉर्टकट जोड़ने वाले एऐक नाले पर इकलौता पुल है।
बता दें कि लोगों का अरनिया में रोज आना जाना इस पुल से होता है। मगर लोहे का छोटा पुल होने के कारण इस पर दोपहिया वाहन व मुश्किल गुजर पाता है। लोग पैदल ही पुल पर चलने के लिए मजबूर हैं। दो महीने पहले हुई बारिश से एऐक नाले का जलस्तर बढ़ने पर लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। दो महीने बीतने के बाद भी पुल का निर्माण कार्य नहीं हो पाया है। लोग आवाजाही के लिए निरंतर लंबे रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते उन्हें अरनिया कस्बे में पहुंचने के लिए आधे घंटे का समय लग रहा है। वहीं दूसरी और इस पुल से लोग 5 से 10 मिनट में अरनिया कस्बे में पहुंच जाते हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि एऐक नाले पर पुल बनाने की मांग बड़ी पहले से की जा रही है। इसकी और पीडब्ल्यूडी विभाग और क्षेत्र के नेता ने गंभीरता नहीं बरती है। उन्होंने कहा कि पुल क्षतिग्रस्त होने से लंबा सफर तय करके अरनिया पहुंचा जाता है। इससे जेब खर्च और समय की बर्बादी होती है। स्थानीय लोगों ने कहा कि 15 गांव के लोगों का इस बार विधानसभा चुनाव में पुल के निर्माण कार्य का अहम मुद्दा रहेगा। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार किसी पार्टी का भी हो, जो पुल बनाने का पक्का आश्वासन देगा। उसे इस बार वोट दिया जाएगा।
एऐक नाला पार कर वह खेतों में पहुंचते हैं। मगर बारिश होने से नाले पर बना लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो जाता है। खेतों तक पहुंचने के लिए नाले को पार करना पड़ता है। जलस्तर बढ़ने के कारण जान जोखिम में डालनी पड़ती है। पुल का निर्माण कार्य समय की जरूरत है। इस बार चुनाव में पुल के मुद्दे को सर्वोपरि रखा जाएगा।
बलराज सिंह, किसान
लोहे के पुल से रोज सैकड़ों लोगों का आना जाना अरनिया कस्बे में होता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए पुल की बहुत अहमियत है। मगर अब तक इस पुल के निर्माण कार्य के लिए किसी प्रकार की भी कोशिश किसी ने नहीं की है। इस बार चुनाव में पुल के मुद्दे को प्रथम श्रेणी में रखा जाएगा।
यशपाल, निवासी गांव शेरेचक