फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: पारा गिरने पर ब्रेन स्ट्रोक के दोगुने मामले, युवा भी चपेट में

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

जम्मू। तापमान गिरने के साथ ब्रेन स्ट्रोक के मामले दोगुने हो गए हैं। जीएमसी की इमरजेंसी सहित संभाग के अस्पतालों में रोजाना नए मामले पहुंच रहे हैं। अमूमन 60 की आयु में होने वाला ब्रेन स्ट्रोक अब 25 से 30 साल के युवाओं को भी चपेट में ले रहा है। ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में जम्मू के बाद डोडा, राजोरी, पुंछ और उधमपुर आगे हैं। संभाग स्तर पर इमरजेंसी रूम में जम्मू के बाद उधमपुुर में सबसे अधिक केस रिपोर्ट हुए हैं।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल जम्मू में कार्यरत न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरदीप कुमार ने बताया कि सामान्य 200 मरीजों की ओपीडी में ब्रेन स्ट्रोक के 8 मामले पहुंच रहे हैं जो पहले से दोगुने हैं। इसी तरह जीएमसी की इमरजेंसी में 5 से 10 केस रिपोर्ट हो रहे हैं। तापमान गिरने पर शरीर में महत्वपूर्ण नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या भी आ रही है। दिमाग की नसों में किन्हीं कारणों से रक्त, ऑक्सीजन और अन्य जरूरी तत्वों का प्रवाह बाधित होने पर ब्रेन स्ट्रोक की समस्या आती है। 80 प्रतिशत मामलों में खून की सप्लाई से ब्लॉकेज हो जाती है। इस्केमिक स्ट्रोक में नसें सिकुड़ने से खून की सप्लाई बाधित होती है जबकि थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक में ब्लॉक का क्लाट नसों में फंस जाता है जो खून की सप्लाई को रोकता है। कई बार पीड़ित को उम्र भर दवाई के साथ फिजियोथैरेपी लेनी पड़ती है। खासतौर पर मधुमेह से पीड़ित लोगों में रक्तचाप बढ़ने पर ब्रेन स्ट्रोक की आशंका अधिक रहती है। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों से लोग प्रभावित हैं। ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ने का मुख्य कारण उच्च रक्तचाप है, जो बदलती जीवनशैली से हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

लक्षण
1. बोलने में हकलाना और समझने में समस्या
2. मुंह पर लकवा, सुन होना
3. चलने में दिक्कत, गिरने जैसा लगना
4. आंखों के आगे अचानक धुंधलापन
5. तेज सिरदर्द, चक्कर, मन खराब, बेहोश

लकवे से बचने के लिए तुरंत करवाएं इलाज
स्ट्रोक होने पर कुछ घंटों के भीतर पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने पर उसे लकवा और जान से बचाया जा सकता है। इसमें स्ट्रोक थ्रंबोलाइसिस इंजेक्शन देकर दिमाग में बने क्लाट को खोल दिया जाता है। मगर इसके लिए निर्धारित अवधि में पीड़ित को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।

इमरजेंसी में जनवरी से अक्तूबर तक इतने केस
डोडा 67
राजोरी 124
पुंछ 190
उधमपुर 232
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें