जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी राजनीति की दशा-दिशा बदलने जा रही है। भाजपा के मिनी कोर ग्रुप की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने हिंदू-मुस्लिम से ऊपर उठकर प्रदेश के आम आदमी के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की नसीहत दी। पार्टी पदाधिकारियों को भी आपसी मतभेद दूर रखते हुए संगठन के हित में काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने दोनों संभागों के महामंत्रियों से मासिक रिपोर्ट तलब की है। प्रदेश में भाजपा के सभी 27 संगठनात्मक जिलों में अधिक से अधिक प्रवास पर जाेर देते हुए उन्होंने कार्यालय पर बैठकों की जगह डोर-टू-डोर जाकर संपर्क बनाने पर ध्यान देने को कहा। हाल ही में 30 सितंबर को खत्म हुए विधानसभा के शरदकालीन सत्र के दौरान पार्टी के रणनीति में सफल रहने पर संतोष जताते हुए उन्होंने पदाधिकारियों को जन मुद्दों को लेकर और हमलावर होने की नसीहत दी।
संगठन में हाल ही में हुए बदलावों पर संकेतों-ही-संकेतों में उन्होंने संदेश दिया कि समय के साथ संगठनात्मक जिम्मेदारी बदल सकती है, लेकिन एक समर्पित कार्यकर्ता संगठन के प्रति अपना बुनियादी कर्त्तव्य न भूले। संगठन का लक्ष्य किसी भी व्यक्ति से बड़ा है। किसी व्यक्ति या पद से बंधे बिना खुद को बेहतर बनाते हुए पार्टी को मजबूत करें। इस दौरान पार्टी की जम्मू-कश्मीर सह-प्रभारी रीना कश्यप, प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सत शर्मा, डॉ. जितेंद्र सिंह, जुगल किशोर शर्मा, गुलाम अली खटाना, पार्टी के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रिया सेठी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना, डॉ. देवेंद्र कुमार मन्याल, राकेश महाजन, अशोक खजूरिया आदि मौजूद रहे।
तरुण चुघ और अशोक कौल का हुआ सम्मान
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और गुजरात प्रभारी तरुण चुघ के साथ ही अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में राष्ट्रीय क्षेत्रीय समन्वयक अशोक कौल को भी जम्मू-कश्मीर में रहते उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित किया। तरुण छह साल तक जम्मू-कश्मीर प्रभारी रहे, जबकि अशोक कौल के पास प्रदेश महासचिव संगठन की जिम्मेदारी थी। वे इस पद पर करीब 14 साल रहे। कौल के मूल संगठन में भेजे जाने को संतोष ने पार्टी का बड़ा मकसद करार दिया। खास तौर पर कश्मीर में डीडीसी चुनाव जीतने और दूर-दराज के दौरे कर संगठनात्मक उपस्थिति बढ़ाने में उनके कार्य को रेखांकित किया। सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी कौल के लंबे कार्यकाल से जुड़ी यादों, मुश्किलों और उपलब्धियों को याद किया। समारोह की अध्यक्षता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने की।
कश्मीर में जम्मू से ले जाने पड़ते थे लोग
सम्मान समारोह के दौरान अशोक कौल ने 1974 में आरएसएस से जुड़ने और एक प्रचारक के तौर पर अलग-अलग भूमिकाओं में सेवा के अपने सफर के बारे में बताया। याद किया कि कैसे एक गंभीर हादसे के बावजूद उन्होंने संगठन का कार्य जारी रखा। एक वह भी काल था, जब कश्मीर में जम्मू से लोग ले जाने पड़ते थे। आज वहां स्थानीय लोग संगठन से जुड़े हैं। मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हैं। कहा कि कार्यकर्ता संगठन के लक्ष्य पूरे करने के साथ ही स्वयं का भी विकास करें।