फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: कुछ पाने की चाहत में नीतू सेठी पहुंची भारत-पाक सीमा पर

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

आरएस पुरा। अगर किसी प्रकार का शौक इंसान रखे, तो उसे पूरा करने के लिए भटककर मंजिल पाना मुश्किल नहीं होता। ऐसी ही सोच लेकर नीतू सेठी आरएस पुरा स्थित भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंच गईं। नीतू सेठी मूलत: दिल्ली की रहने वाले हैं। उन्हें पक्षियों को देखने का जुनून इतना है कि वह उनकी एक झलक पाने के लिए देश और विदेश में कहीं भी पहुंच जाती हैं। उन्हें परिंदों की फोटोग्राफी करने का शौक नहीं, लेकिन उनकी झलक देखने का शौक है तो महज पक्षियों को दूरबीन से देखकर निहारने का है। तसल्ली होने तक वह हर नए पक्षियों को देखना चाहती हैं।
यही जुनून उनको दिल्ली से जम्मू के घराना वेटलैंड तक खींच लाया। मकसद था टुंडरा बीन गूज को देखा जाए, जिसको देखने की उनकी बरसों से लालसा थी। यह पक्षी भारत में चंद ही जगह पर आज तक दिख पाया है। साइबेरिया या उससे भी दूर यह पक्षी पाए जाते हैं। शायद वहीं से एक पक्षी घराना में आ पहुंचा और देश के पर्यावरणविदों का ध्यान अपनी ओर खींचा। नीतू सेठी का ध्यान इस पक्षी में था। नीतू सेठी दो दिन तक जम्मू रहीं और दूरबीन से इस पक्षी को निहारती रहीं। बाकी के परिंदों में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी, क्योंकि वो सारे उन्होंने दूसरे वेटलैंड क्षेत्रों में देख रखे थे। मगर टुंडरा बीन गूज को वह पहली बार देख रही थीं। काफी समय तक वह दूरबीन से इस पक्षी को निहारती रहीं। उन्होंने कहा कि इस पक्षी को देखने की तमन्ना अब पूरी हुई। देश में जब-जब यह पक्षी कहीं देखा गया, तो वहां पहुंचने की कोशिश तो बहुत की, मगर सफल नहीं हो पाईं। मगर अब यह अभिलाषा पूरी हो गई। लगे हाथ रूक (कपटी) को भी देखा जो पहले नहीं देखा था। यह पक्षी भी खास है, जो सर्दियां बिताने जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्रों में आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नीतू कहती हैं कि देश-विदेश में जहां कहीं उनको नए पक्षी के बारे में पता लगता है, वह उसे देखने के लिए पहुंच जाती हैं। उन्होने कहा कि भारत-पाक सीमा पर यहां थोड़ी दूरी पर सरहद है, वहा कई प्रजातियों के पक्षियों का हजारों मील सफर तय करना भी अद्भुत है। पक्षियों के लिए आज तक कोई सरहद नहीं बनीं और दुनिया में न कभी बन पाएगी। उन्होंने बताया कि पक्षियों की कई प्रजातियां हैं जैसे कौवे। कौवे का रंग काला होता है, हमारे देश के मध्य प्रदेश राज्य के दतवाडा क्षेत्र में सफेद कौवा देखने को मिलता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें