अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जिले के ब्लॉक भलवाल की पांच पंचायतों के लिए एकमात्र खेल का मैदान असुविधा व अव्यवस्था का शिकार है। सात से आठ कनाल के मैदान में युवा किसी भी खेल को निखार नहीं पा रहे। सुविधाओं का अभाव प्रतिभाओं को आगे बढ़ने से रोक रहा है। ग्रामीण स्तर पर सरकार के खेल ढांचे के विकास के दावे मिट्टी में मिल रहे हैं। अंब, अंब लोअर, घरोटा अपर, घरोटा लोअर और गैंक पंचायत के नौजवानों का खेलों से मोह भंग हो रहा है।
हालात ऐसे हैं कि धर्मखू गांव के पास मैदान उबड़-खाबड़ है। अगर नौजवान खेलते हैं तो चोट लगने की खतरा बना रहता है। मनरेगा के तहत कुछ समय पहले मैदान पर कुछ काम हुआ, मगर पैसों की कमी आड़े आ गई। पांचों पंचायत के युवा सुबह और शाम मैदान पर बच-बचकर खेलते हैं। मैदान के चारों ओर घनी झाड़ियां है। गंदगी का अंबार है। बारिश होने के बाद दो दिन तक पानी भरा रहता है। अंब लोअर के सरंपच जसवंत सिंह ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। पंचायत में इतना फंड नहीं मिलता। खेल विभाग या जिला कैपेक्स बजट से मैदान को तैयार करवाया जाए तो लाभ मिलेगा।
शहर जितनी सुविधा हो तो राष्ट्र को मिलेंगी नई प्रतिभाएं
नौजवान अंकुश वर्मा ने बताया कि मैदान में चोट लगने का खतरा बना रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अगर शहर जितनी सुविधा हो तो नई प्रतिभाएं राष्ट्र को मिलेंगी। सरकार को ध्यान देना चाहिए। शुभम वर्मा ने कहा-पंचायतों में जहां खेल मैदान है वहां सुविधा नहीं है। शहर में स्टेडियम तक है, लेकिन गांव में बुनियादी सुविधा का एक मैदान नहीं है। संजीव सिंह ने कहा-खेल मैदान है, लेकिन कुप्रबंध का आलम है। खेलने के लिए कोई और मैदान भी नहीं है। ऐसे में मजबूरी में यहीं खेलना पड़ता है। सरकार खेल ढांचे के विकास की बात तो करती है, लेकिन गांव में आज भी स्थिति जस की तस है। इसी तरह सुखदेव मंगोत्रा ने कहा कि युवाओं में प्रतिभा है, लेकिन सुविधा का अभाव उसे निखारने से रोक रहा है। सरकार को चाहिए कि मैदान को खेलने योग्य बनाए। अमन सिंह के अनुसार मैदान बन जाए तो पांच पंचायतों को सुविधा मिलेगी।