दोमाना। बाबा कैलख मंदिर ठठर बनतालाब में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास ध्यानु भगत ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीला का वर्णन किया। साथ ही मनोरम झांकी का अवलोकन करवाया। कृष्ण जन्म कथा के बाद पूतना वध, यशोदा मां के साथ बालपन की शरारतें, गो प्रेम, माखन चोरी और गोपियों का प्रसंग सुनाया। आगे कहा - कंस का आमंत्रण मिलने के बाद भगवान श्री कृष्ण बड़े भाई बलराम के साथ मथुरा प्रस्थान करते हैं। बीच-बीच में भजनों पर श्रोता भावविभोर हो गए। कथा व्यास ने बताया कि भागवत कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। कलयुग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मानस पुण्य तो सिद्ध होते हैं, परंतु पाप नहीं। कलयुग में हरि नाम से ही जीव का कल्याण है। ईश्वर का नाम ही काफी है। सच्चे हृदय से हरि नाम के सुमिरन मात्र से कल्याण संभव है। कठिन तपस्या और यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं है जबकि सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में ऐसा नहीं था। अंत में गोवर्धन पूजा की गई।