दोमाना। भलवाल ब्लॉक की पंचायत लोअर रांजण के गांव बैरी छपड़ी के लिए आजादी के 75 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं बन पाई है। गांव के 200 घरों की करीब 900 आबादी की डगर आज भी मुश्किलों भरी है। स्थानीय निवासी सुरिंदर सिंह, अशोक मन्हास रंजीत सिंह, चंचला देवी, गार सिंह चिब, अंग्रेज सिंह ने बताया कि हल्की बारिश होने पर भी सड़क कीचड़ से भर जाती है। यह दो किलोमीटर सड़क गुड़ा पतन से होते हुए नेशनल हाईवे से जुड़ती है और बैरी छपड़ी, सूदन मोहल्ला, जैलधार मोहल्ला, जाट मोहल्ला, चिब मोहल्ला सहित पांच गांवों को जोड़ती है। इन गांवों के लोग सड़क बनने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली है। सरकार जहां गांवों को सड़कों से जोड़ने के दावे कर रही है, वहीं लोअर रांजण पंचायत का यह गांव आज भी विकास की राह देख रहा है। यहां रहने वाले अधिकांश ग्रामीण मजदूरी कर परिवार का जीवन यापन करते हैं। लेकिन सड़क कच्ची होने से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़क पर कीचड़ और फिसलन होने से बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। कई बार लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। बैरी छपड़ी भलवाल के अंतिम छोर पर बसा गांव है। इस कारण यहां विकास की किरन आज तक नहीं पहुंच पाई है। गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। एंबुलेस तक गांव में नहीं पहुंच पाती। गांव में माध्यमिक स्कूल तक नहीं है, जो पहले था वह भी बंद हो चुका है, जिसे अब पंचायत घर बना दिया गया है। पढ़ाई के लिए बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारी हर बार आश्वासन देते हैं कि प्लान में काम को रखा गया है, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
सड़क की परेशानी, लोगों की जुबानी
ग्रामीण सुरिंदर सिंह का कहना है कि गांव की कच्ची सड़क से बरसात के दिनों में आने-जाने में भारी परेशानी होती है। अशोक मन्हास का कहना है कि सड़क में कीचड़ होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। प्रदेश प्रशासन भले ही विकास के लाख दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रंजीत सिंह का कहना है कि गांव बैरी छपड़ी में विकास न होने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ रोष है। छात्र समीर सिंह का कहना है कि वह इसी सड़क से रोजाना स्कूल जाते हैं, लेकिन सड़क पर कीचड़ होने से वर्दी गंदी हो जाती है। चंचला देवी का कहना है कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से इस सड़क की हालत खस्ता है। उनका ससुराल भी अब यहीं पर है, अब तो उनके बच्चों के भी बच्चे बड़े हो गए हैं। चार साल पहले जहां के पूर्व विधायक दविंदर सिंह राणा ने अपने सीडीएफ फंड से सड़क पर कंकरीट डलवाई थी, लेकिन इसे पक्का नहीं किया गया। रानो देवी ने बताया कि उनकी उमर 80 साल के करीब है। सड़क को पक्का देखने के लिए उनकी तीसरी पीढ़ी चली है। लेकिन सड़क पक्की होती नहीं दिख रही।
इस सड़क को पक्का करने के लिए प्लान तैयार किया गया है। जैसे ही सरकार से फंड जारी होगा इसका टेंडर लगा दिया जाएगा। कच्ची सड़क को जल्द पक्का कर लोगों को राहत दी जाएगी।
सुरेश खजुरिया, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग