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आर्टिकल 370 निरस्त: कश्मीरी पंडितों की होगी घर वापसी, पाइपलाइन में कई योजनाएं, रियायत पर जमीन देने पर भी मंथन

Sat, 05 Aug 2023 12:33 PM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

पीएम पैकेज के लगभग छह हजार पद भर लिए गए हैं, जो पूर्व में इस आशंका में नहीं भरी जाती थीं कि दोबारा कश्मीरी पंडित घाटी में लौट न आएं। उनकी आवास समस्या का भी निदान किया जा रहा है।
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Kashmiri Pandit - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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तीन दशक से भी अधिक समय से विस्थापन का दर्द झेल रहे कश्मीरी पंडितों में आस जगी है कि अब घाटी का माहौल व आबोहवा बदल रही है, उन्हें अपनी माटी से जुड़ने का मौका मिल सकता है। लेकिन टारगेट किलिंग की घटनाओं से उनमें माहौल के सामान्य होने को लेकर संशय भी है। हालांकि, सरकार की ओर से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की दिशा में युद्धस्तर पर काम किए जा रहे हैं। 

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पीएम पैकेज के लगभग छह हजार पद भर लिए गए हैं, जो पूर्व में इस आशंका में नहीं भरी जाती थीं कि दोबारा कश्मीरी पंडित घाटी में लौट न आएं। उनकी आवास समस्या का भी निदान किया जा रहा है। सरकार की ओर से स्थायी रूप से कश्मीरी पंडितों को बसाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें उन्हें रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराना है।

कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए यूपीए सरकार में छह हजार सरकारी पद सृजित किए गए थे। साथ ही छह हजार सरकारी आवास भी बनाए जाने थे, लेकिन यह परवान नहीं चढ़ पा रही थी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद इसमें तेजी लाई गई। लगभग सभी छह हजार पद भर दिए गए हैं। 
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सरकारी आवास बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है, जो अगले साल के शुरूआत तक पूरा हो जाएगा। इनकी जमीनों पर हुए कब्जे तथा दबाव में जमीन बेच डालने पर सरकार ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए पोर्टल शुरू किया गया। इस पोर्टल पर मिली शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। 

अब सरकार इनके स्थायी पुनर्वास की दिशा में प्रयास कर रही है। सूत्रों के अनुसार इसके लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिन्हें निकट भविष्य में लागू किया जा सकता है। इनमें रियायती दर पर उन्हें जमीन मुहैया कराकर ज्यादा से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने की योजना पर भी काम चल रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस योजना का खुलासा नहीं किया गया है।

कश्मीरी पंडितों का कहना है कि माहौल में तो बदलाव आया है। अब कश्मीर में उन्हें उतनी हिकारत भरी नजरों से नहीं देखा जाता है। लेकिन जब तक उन्हें सुरक्षा की मुकम्मल गारंटी नहीं मिलेगी तब तक सारे प्रयास नाकाम ही रहेंगे। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को आतंकी संगठनों की ओर से समय-समय पर निशाना बनाया जाता है। 

इससे उनमें डर का माहौल बनने लगता है। कश्मीरी पंडित सतीश महालदार का कहना है कि माहौल में तो निश्चित रूप से बदलाव आया है, लेकिन अभी बहुत करने की जरूरत है। सरकार को विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने चाहिए। कश्मीरी पंडितों की जमीनों से कब्जे हटाए जाने चाहिए। उन्हें औने-पौने दामों में जमीन बेचने वालों को भी चिह्नित करना चाहिए ताकि आम कश्मीरी बिना किसी डर के कश्मीर जाए।

नागरिकता तो मिली, लेकिन डोमिसाइल अब भी दे रहा दर्द

नागरिकता का हक पाने वाले पश्चिमी पाक रिफ्यूजी, वाल्मीकि समाज और गोरखा समाज का कहना है कि उन्हें नागरिकता तो मिली है। पहचान भी मिल गई है लेकिन अब भी उन्हें वास्तविक रूप से अधिकार के लिए जूझना पड़ रहा है। जो डोमिसाइल बनाए जा रहे हैं उनमें कैटेगरी बनाई गई है। यह अब भी दर्द दे रहा है। 

पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों के नेता लब्बा राम गांधी का कहना है कि डोमिसाइल मिलने की खुशी है। अब समाज के लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों में भी हाथ आजमाने का मौका मिल रहा है, लेकिन जो इसमें कैटेगरी बनाई गई है उससे उन्हें पूरा अधिकार नहीं मिल पा रहा है। सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए।

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