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जम्मू कश्मीर: सेना ने रिकॉर्ड समय में तैयार कर दिया 170 फुट लंबा कुंडेल पुल, लोगों ने मत्था टेक किया पार

Sat, 30 Jul 2022 08:14 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जिला प्रशासन के अनुरोध पर इस पुल को बनाने के लिए सेना ने लगातार काम किया है। खराब मौसम और विपरीत परिस्थितियों में कार्य करते हुए सेना ने इस 170 फुट लंबे बेली पुल का निर्माण कर शनिवार को लोगों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया।
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किश्तवाड़ में पुल तैयार करते जवान - फोटो : पीआरओ वीडियो
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विस्तार
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मचैल यात्रा को आसान बनाने वाले कुंडेल पुल को शनिवार को आम लोगों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। इस 170 फुट लंबे पुल का निर्माण सेना ने दिन रात मशक्कत कर किया है। इसके न होने से यात्रा काफी प्रभावित हो रही थी। 

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कुंडेल पुल के बनने का इंतजार सभी मचैल यात्री कर रहे थे। 25 जुलाई से शुरू हुई मचैल यात्रा से पहले इस पुल को तैयार करने की बात चल रही थी, लेकिन ऐसा हो न सका। जिला प्रशासन के अनुरोध पर इस पुल को बनाने के लिए सेना ने लगातार काम किया है।

खराब मौसम और विपरीत परिस्थितियों में कार्य करते हुए सेना ने इस 170 फुट लंबे बेली पुल का निर्माण कर शनिवार को लोगों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया। पुल बहाल होने से पैदल यात्रियों को लगभग 15 किमी की राहत मिली है।

  • इस पुल के न होने से उन्हें लगभग तीन घंटे अधिक पैदल चलकर गंतव्य तक जाना पड़ता था। शनिवार सुबह आम जनता व यात्रियों के लिए पुल बहाल होने पर लोगों में उत्साह का माहौल रहा
  • हालांकि, अभी इस पर सिर्फ लोग ही आवाजाही कर सकते हैं। यात्रा पर आए लोगों के लिए घोड़ा और खच्चरों को भार की पड़ताल करने के बाद ही पुल से गुजरने की अनुमति मिलेगी।

तीन सौ अधिक भक्तों ने किए माता के दर्शन

शनिवार को मचैल में तीन सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने माता चंडी के दर्शन किए। किश्तवाड़ शहर से दिन भर भक्त माता के जयकारे लगाते हुए गुजरते रहे। जानकारी के अनुसार 1 अगस्त से गुलाबगढ़, कुंडेल, आदि स्थानों पर लंगर खोले जाएंगे।

पिछले वर्ष बाढ़ में बह गया था पुल

गौरतलब है कि पिछले माह मचैल मार्ग पर बना लकड़ी का पुल बारिश में बह गया था। उसके बाद लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़। पिछले वर्ष भी इसी जगह मचैल माता यात्रा के रास्ते में मौजूद पुल कुंडेल गांव में अचानक आई बाढ़ के कारण बह गया था, जिससे मचैल माता यात्रा बाधित हो गई थी। उस समय भी यात्री मस्सू से पैदल पहाड़ी व कुकानद्रंव गांव से होकर मचैल आए थे। कुछ समय बाद एक लकड़ी का पुल बनाया गया था जोकि पिछले माह भारी बारिश के दौरान भोट नाले में बह गया था। 

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