देश भर में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है। मौजूदा कोविड के कारण जिला स्तर पर पहले ही आइसोलेट बेड की व्यवस्था है। जिससे जिला अस्पताल प्रशासन को मंकीपॉक्स के संदिग्ध मामलों के लिए आइसोलेट वार्डों का प्रयोग करने को कहा गया है। श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और जम्मू एयरपोर्ट से प्रतिदिन हजारों देश-विदेश के यात्रियों का आवागमन हो रहा है। ऐसे में संदिग्ध मामलों के पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. हरजीत राय का कहना है कि मंकीपॉक्स को लेकर पहले ही सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध मामलों को संबंधित आइसोलेट वार्डों में उपचार दिया जाएगा। विदेशों से आने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य पर खास ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंकीपॉक्स को वैश्विक आपातकाल घोषित किया हुआ है।
संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, त्वचा पर चकते (चेहरे से शुरू होकर हाथ, पैर, हथेलियों और तलवों तक) पड़ते हैं। मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द या थकावट, गले में खराश और खांसी आने के साथ संक्रमित व्यक्ति को कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। जैसे आंख में दर्द या धुंधला दिखना, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, पेशाब में कमी, बेहोश होना या दौरे पड़ सकते है। जोखिम श्रेणी वाले व्यक्तियों में मंकीपॉक्स के गंभीर प्रभाव पड़ने की अधिक संभावना होती है। मंकीपॉक्स आम तौर पर बुखार, दाने या गांठ के जरिए उभरता है और इससे कई प्रकार की चिकित्सा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। मंकीपॉक्स किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क के माध्यम से या वायरस से दूषित सामग्री के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। ऐसा माना जाता है कि यह चूहों, गिलहरियों जैसे जानवरों से फैलता है।