राजस्थान की माइक्रो सिलिका रेत का किया जा रहा प्रयोग
दीवारों पर लगाई जा रही विशेष तरह की टाइल में व्हाइट सीमेंट के साथ माइक्रो सिलिका रेत का प्रयोग किया जा रहा है, जो राजस्थान की प्राकृतिक रेत है। माइक्रो सिलिका का उपयोग उच्च शक्ति वाले कंक्रीट बनाने के लिए किया जाता है, जो अक्सर इमारतों, सड़कों और पुल जैसी प्रमुख परियोजनाओं में आवश्यक होता है। यह उच्च शक्ति वाले कंक्रीट की आवश्यकता को पूरा करती है। वैसे यह रेत रोड़ी उदयपुर में भी पाई जाती है, लेकिन उसकी तुलना में राजस्थान की प्राकृतिक रेत की गुणवत्ता बेहतर है। इनके मिश्रण से कंकरीट की विशेष तरह की टाइल का निर्माण एम्स विजयपुर के भीतर ही किया जा रहा है।
टाइल लगाने का काम 90 फीसदी तक पूरा
एम्स के सभी भवनों पर साइज की जरूरत के मुताबिक टाइल का लाल और ग्वालियर सफेद रंग में निर्माण किया जा रहा है। एम्स के उत्तरी क्षेत्र में लाल रंग और दक्षिण क्षेत्र में लाल और ग्वालियर सफेद रंग के मिश्रण वाली टाइल लगाई जा रही है। इसका 90 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है और मार्च तक बाकी काम पूरा कर लिया जाएगा। यह टाइल एक स्टोन की तरह दिखती है। इसमें प्रति स्कवेयर फीट टाइल को लोहे के साथ तैयार करने में लगभग 500 रुपये खर्च पड़ रहा है।
देश के किसी भी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में जीआरसी क्लेडिंग प्रणाली का उपयोग नहीं किया गया है। एम्स विजयपुर में इसके कई फायदे मिलेंगे। - डाॅ. शक्ति गुप्ता, निदेशक, एम्स विजयपुर जम्मू