जम्मू। स्कॉस्ट जम्मू में कृषि खाद्य प्रणालियों के लिए सतत कृषि नवाचार विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश से शुरू होने वाली बैंगनी क्रांति स्टार्ट अप के अधिक अवसर प्रदान कर रही है। लैवेंडर की खेती ने किसानों की तकदीर बदली है।
उन्होंने कहा कि भारत में नवाचार की गति वैश्विक स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन मानसिकता में भी बदलाव को भी उसी गति से प्रोत्साहित करने की जरूरत है। डॉ. जितेंद्र ने कहा कि बांस को वन अधिनियम से छूट दी गई है। इससे युवा कृषि उद्यमिता के साथ-साथ बांस से भी विभिन्न प्रकार की चीजें बनाने का व्यवसाय शुरू कर रहे हैं।
वहीं कार्यक्रम केे समन्वयक डॉ. राजेंद्र पेशिन ने कहा कि पोस्टर प्रजेंटेशन के लिए 232 प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। हालांकि 300 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण किया था। इंडियन इकोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एके ने इडियन इकोलॉजिकल सोसाइटी की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। वर्जीनिया टेक्नॉलोजी विश्वविद्यालय यूएसए के निदेशक डॉ. मुनि मुनिअप्पन, आनंद एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केबी कथारिया, डॉ. केके सूद सहित अन्य भी उपस्थित रहे।
एरोमा मिशन से लाभान्वित हो रहे किसान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में कृषि में पानी की कमी, भूमि की घटती उपलब्धता, भूमि विखंडन, कृषि उपज की बर्बादी, कृषि के प्रति युवाओं की उदासीनता और रोजगार की बेहतर सुविधाओं की तलाश में ग्रामीणओं का शहरों की ओर पलायन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टिकाऊ कृषि नवाचार की चुनौतियों को दूर करने के लिए पारंपरिक कृषि प्रणाली से नई प्रथाओं, पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिवर्तन पर जोर दिया।
उद्योगों और अन्य हितधारकों के सहयोग से काम करने और कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शुरू किया गया पर्पल मिशन और एरोमा मिशन अब उत्तर-पूर्वी हिमालय में फैल रहा है। इससे अधिक संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।