जम्मू में पहली बार अग्निवीर योजना के तहत भर्ती रैली सात अक्तूबर से होने जा रही है। शहर के सुंजवां आर्मी स्टेशन में भर्ती रैली होगी, जो 22 अक्तूबर तक चलेगी। इसमें जम्मू संभाग के दस जिलों से उम्मीदवार भाग ले रहे हैं। शुक्रवार को पहले दिन सांबा जिले के युवा भर्ती में भाग लेंगे।
वीरवार को सेना की टाइगर डिवीजन के अधिकारियों ने जोरावर स्टेडियम का दौरा कर आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। जम्मू में पहली बार अग्निपथ योजना के तहत सेना में अग्निवीर की भर्ती होने जा रही है। संभाग के जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, पुंछ, राजोरी, रियासी, डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिले के उम्मीदवार भर्ती रैली में भाग लेंगे।
आयोजन स्थल के बाहर देर रात से युवा उम्मीदवारों का जमवाड़ा लगा रहा। रात 12 बजे के बाद युवाओं को प्रवेश दिया गया। कड़ी सुरक्षा में होने जा रही भर्ती रैली को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया गया।
सुंजवां मिलिट्री स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वारा पर पुलिस बल तैनात किया गया है। शुक्रवार को पहले दिन सांबा जिले के युवाओं को अग्निवीर बनने का मौका मिलेगा। पहले सांबा जिले के युवा ही भर्ती स्थल पर बुलाए गए है।
भर्ती रैली में आने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रवेश पत्र अनिवार्य है। बिना उसके प्रवेश नहीं मिलेगा। भर्ती रैली स्थल पर युवाओं को प्रवेश मध्यरात्रि 12 बजे से सुबह सात बजे तक मिलेगा। उम्मीदवारों को जरूरी दस्तावेज भी साथ लाना होंगे।
बठिंडी में कोचिंग कक्षाएं चला रही सेना
राष्ट्रीय सैन्य स्कूल, सैनिक स्कूल और राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज में प्रवेश परीक्षा की तैयार करने वाले युवाओं के लिए सेना ने कोचिंग कक्षाएं शुरू की हैं। शहर के बठिंडी में सेना की टाइगर डिवीजन की शिवालिक ब्रिगेड ने ये कक्षाएं शुरू की हैं।
शिवालिक ब्रिगेड ने नागरिक प्रशासन के विभिन्न विभागों के समन्वय से यह पहल शुरू की है। सेना ने आठ कोचिंग कक्षाएं शुरू की है। स्क्रीनिंग परीक्षा 27 सितंबर को आयोजित की गई थी, जिसमें कक्षा छठीं में प्रवेश के लिए 109 छात्र तो कक्षा नौ में प्रवेश के लिए 98 छात्र उपस्थित हुए थे।
स्क्रीनिंग परीक्षा चिराग पब्लिक स्कूल और गवर्नमेंट हाई स्कूल बठिंडी में हुई थी। मेरिट सूची के आधार पर चयनित विद्यार्थियों को एक अक्तूबर से कोचिंग दी जा रही है। वीरवार को भारतीय सेना के अधिकारियों और आम लोगों की बैठक हुई। इसमें बच्चों को स्कूल बैग और स्टेशनरी प्रदान की गई। बच्चों के अभिभावकों ने सेना के इस प्रयास की प्रशंस की।