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Jammu News: गांव शेर-ए-चक में अतिक्रमण वाले रास्ते पर पहुंचे पटवारी, जांच कर बताया सरकारी

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फीते से की रास्ते की पैमाइश, राजस्व विभाग के पास है रास्ते का अधिकार
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। गांव शेर-ए-चक में रास्ते पर अतिक्रमण के मामले में वीरवार को पटवारी रिकॉर्ड लेकर पहुंचे। उन्होंने फीते से अतिक्रमण वाले रास्ते की पैमाइश की। बताया है कि सुचेतगढ़ राजस्व रिकॉर्ड के अंतर्गत यह रास्ता नहीं दिख रहा है, लेकिन यह जगह सरकारी है, और राजस्व विभाग का इस पर अधिकार है।
पटवारी ने बताया कि रिकॉर्ड के अनुसार गांव की हदबंदी सामने नहीं आ रही है। इसलिए, अरनिया तहसील और सुचेतगढ़ तहसील को मिलकर इस रास्ते पर निशानदेही करनी पड़ेगी। सबसे पहले दोनों तरफ से क्षेत्र की हदबंदी की जाएगी। उसके बाद रिकॉर्ड के अनुसार रास्ते की निशानदेही की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुचेतगढ़ तहसील के बंदोबस्ती रिकॉर्ड में यह रास्ता नहीं है। इससे पहले की जो रिपोर्ट लोगों द्वारा पेश की गई है, उसमें भी थोड़ी असमंजस है। इसलिए, जब तक दोनों ओर से हदबंदी नहीं की जाएगी, तब तक कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है। सुचेतगढ़ तहसील के अंतर्गत गांव शेर-ए-चक की हदबंदी की निशानी रिकॉर्ड के अनुसार ढूंढी जा रही थी, लेकिन वह विलुप्त हो गई है। इस कारण 30 से 35 फुट का फर्क आ रहा था। उन्होंने कहा कि सड़क बनने के कारण निशानी क्षतिग्रस्त हो गई है, या किसी और वजह से वह टूट गई है, जिसके चलते स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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मौके पर ग्रामीणों ने पटवारी से पूछा कि अगर सुचेतगढ़ तहसील के अंतर्गत रास्ता नहीं दिख रहा है तो इससे पहले की जो निशानदेही हुई थी, और उसका नक्शा भी बनाया था, उस पर रास्ता कैसे अंकित किया गया था? वह भी रेवेन्यू विभाग द्वारा ही बनाया गया था और उसमें खसरा नंबर के तहत किस किस व्यक्ति के पास कितना कब्जा है, वह भी दर्शाया गया था। ग्रामीणों ने कहा कि पुराने बंदोबस्त के मुताबिक अगर रास्ते की मालिक सरकार है और रेवेन्यू विभाग के पास है तो उससे पहले के बंदोबस्त में रास्ते की स्थिति क्या है। ग्रामीणों ने कहा कि पटवारी अपने रिकॉर्ड का सही से स्पष्टीकरण नहीं दे पा रहे हैं। इस मुद्दे पर ज्यादा जानकारी के लिए तहसीलदार सुचेतगढ़ निर्भय शर्मा को कई बार फोन किया गया, लेकिन वह हर बार बात करने से बचते नजर आए।
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अतिक्रमण वाला रास्ता वीरवार को देखा गया। रिकॉर्ड के मुताबिक सुचेतगढ़ तहसील के अंतर्गत वहां रास्ता नहीं है। गांव की हदबंदी की पैमाइश की गई थी, परंतु उसमें स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। अरनिया राजस्व विभाग के पटवारी के साथ मिलकर दोनों तरफ से हदबंदी की जाएगी। उसके बाद ही रास्ते की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। एक हफ्ते बाद फिर से दोनों तरफ के राजस्व विभाग के अधिकारी इकट्ठा होकर मुद्दे का संज्ञान लेंगे।

- मोहम्मद यूनिस, पटवारी
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