- एप में पंजीकृत नहीं होने से लाइन में लगने के बाद भी बिना इलाज लौट रहे मरीज
- बुजुर्ग परेशान, गर्भवती महिलाओं को कतारों में लगकर आ रहे चक्कर
जम्मू। आभा एप मरीजों के इलाज में बाधा बन रहा है। एप में पंजीकृत नहीं होने से लाइन में लगने के बाद भी बिना इलाज करवाए मरीज घर लौट रहे हैं। मंत्रालय ने यह एप लोगों को लंबी कतारों से बचाने के लिए बनाया था। श्री महाराजा गुलाब सिंह (एसएमजीएस) शालामार अस्पताल में एप को भी डाउनलोड करने के बाद ही पंजीकरण हो रहा है। लाइन में खड़े होने के बाद नंबर आने पर उन्हें वापस एप डाउनलोड कर दोबारा कतार में लगने के लिए कहा जा रहा है।
अस्पताल में इलाज करवाने आई महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि वह फोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। ऐसे में इलाज करवाने में समस्या आ रही है और कई बिना इलाज करवाए ही लौट गए। कई गर्भवती महिलाएं लाइन में लगने की समस्या से बचने के लिए प्राइवेट क्लीनिक में इलाज करवा रही हैं। एक गर्भवती महिला ने बताया कि अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए वह सुबह से लाइन में खड़ी है। चक्कर आने के कारण अब बाहर से अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूर है। स्किन ओपीडी में इलाज करवाने आए बुजुर्ग ने बताया कि सुबह से खड़े हैं, लेकिन मोबाइल नहीं होने के कारण इलाज करवाने में असमर्थ हैं। अस्पताल को मरीजों की समस्या का समाधान करना चाहिए।
सुबह से लाइन में खड़ी हूं और आगे पहुंची तो आभा एप डाउनलोड कर लाइन में लगने के लिए कहा। मैं सुबह से दो बार चक्कर खाकर गिर चुकी हूं, लेकिन अभी तक इलाज नहीं करवा पाई। मुझे बख्शी नगर अस्पताल वालों ने भेजा है। अब मैं कहां जाऊं कोई मुझे यह बता दे।
कुंती देवी
शालामार अस्पताल में 8 दिन पहले भर्ती थी, क्योंकि मेरे मैं खून की कमी हो गई थी। मुझे किडनी में भी दिक्कत है। दिनभर लाइन में लगी हूं । आज सिर्फ चेकअप करवाने आई थी अब इस हालत में किस विभाग के पास जाऊं और किसको यह बोलूं कि मैं अब नहीं खड़ी हो पाउंगी और न मुझे मोबाइल चलाना आता है ।
गुड्डी देवी
मेरी उम्र 75 साल है सुबह पहले यहां इलाज करवाने के लिए बैठा रहा। मगर अभी तक पर्ची भी नहीं बनी है। मैंने अपने पोते को फोन कर बुलाया है ताकि मेरा इलाज हो सके। लेकिन अभी तक वह भी नहीं पहुंचा है। दोपहर दो बजे तक इलाज नहीं हो पाया है।
मंगत राम ठाकुर
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आभा एप से टोकन नंबर लेकर मिलती है पर्ची
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आभा कार्ड लाॅन्च किया था। आभा एक डिजिटल प्लेटफार्म है, जिसमें आप अपने परिवार की बेसिक हेल्थ और उससे जुड़े डेटा को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं। ये पूरी तरह से फ्री है। ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले मरीज अस्पताल को ओपीडी पर्ची काउंटर पर लगाए क्यूआर कोड से फोन को एप के जरिये स्कैन करना पड़ता है। इसके बाद एक टोकन नंबर मिलता है। यह नंबर आधा घंटे के लिए मान्य होगा। इससे मरीज का विवरण कंप्यूटर में आ जाएगा। मरीज को काउंटर पर टोकन नंबर बताकर 10 रुपए देकर पर्ची लेनी होगी।
अस्पताल में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से पर्चियां दी जा रही हैं। कई लोगों के माेबाइल आधार कार्ड से लिंक नहीं हैं। इसलिए उनको यह एप इस्तेमाल करने में समस्या आ रही है।
डॉ. दारा सिंह, एमएस, एसएमजीएस अस्पताल