करिश्मा चिब जम्मू। शिक्षा विभाग की तरफ से ऑनलाइन क्लासीज शुरू करने के निर्देश तो जारी कर दिए गए पर वास्तविकता कुछ और ही है। जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा ठप के होने के बाद केवल 2 जी सेवा ही शुरू की गई है। जिसपर ऑनलाइन पढ़ाई करना बेहद मुश्किल है। कुछ विद्यार्थियों के पास वाई फाई की सुविधा है तो उन्हें इतनी दिक्कत नहीं आती पर कुछ के पास केवल फोन का इंटरनेट की एकमात्र विकल्प है। ऐसे में न तो वह ऑनलाइन पढ़ाई के संबंधित कोई वीडियो देख सकते हैं और न ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होने वाला कक्षा का सही ढंग से लाभ उठा पा रहे हैं। विभिन्न इंस्टीट्यूटों के विद्यार्थियों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की अपील की जा रही है। ताकि ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए आने वाली समस्याएं का समाधान किया जा सके। 10वीं कक्षा के अंकुश ने बताया कि शिक्षकों द्वारा कई बार ज्यादा एमबी की वीडियो और पढ़ाई से संबंधित सामग्री भेजी जाती ही। जिसे डाउनलॉड करने में बहुत समय लगता है। और कई बार तो यह डाउनलोड होती भी नहीं है। वहीं 11वीं कक्षा की अनिता का कहना है कि यूट्यूब पर 2जी पर वीडियो चल ही नहीं पाती, ऐसे में पढ़ाई करें भी तो कैसे करें। नहीं है वीडियो कॉल पर कलैरिटी प्राइवेट स्कूलों द्वारा वीडियो कॉल पर क्लासीज ली जा रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि कभी शिक्षक की आवाज नहीं आती तो कभी कुछ भी दिखाई नहीं देता। 2 जी नैटवर्क पर क्लास लगाना बेहद मुश्किल है। कई बार तो आधी बातें सुनाई ही नहीं देती और कई आवश्यक चीजें छूट जाती हैं। यदि ऐसे ही इंटरनेट की स्पीड रही तो कैसे पढ़ाई हो पाएगी और परीक्षा कैसे दे पाएंगे। 4 जी सेवाएं शुरू करने की कर रहे हैं अपील सोशल मीडिया पर विद्यार्थियो, युवाओं और यहां तक कि अभिभावकों द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासन से 4जी सेवाएं फिर से शुरू करने की अपील की जा रही है। सभी का कहना है कि यदि 4 जी इंटरनेट सेवा शुरू हो जाती है तो कम से कम विद्यार्थी घर पर बैठ कर पढ़ाई तो करे पाएंगे। सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के पास नहीं हैं फोन बात की जाए सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों की तो उनमें से कुछ बहुत ही गरीब परिवारों से आते हैं जिनके पास तो फोन या लेपटॉप जैसे कोई भी साधन नहीं है, ऐसे में ऑनलाइन क्लासीज का फायदा उन्हें नहीं उठा पा रहे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों के घरों तक किताबें पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।