पानी न मिलने से विभिन्न क्षेत्रों में प्यासी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गईं हैं। इससे किसान बहुत परेशान हैं उनका कहना है कि बारिश नहीं होने से गेहूं के अंकुर भी ठीक से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
इसके अलावा सब्जियों की फसलें भी सूखने के कगार पर आ गई हैं। सिंचाई के लिए नहरों का पानी भी पर्याप्त नहीं मिल पा रहा है।
कई दिनों से अरनियां के किसान यहां बारिश की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं वहीं खेतों में बीजी गई गेहूं फसल के अंकुर ठीक से बाहर नहीं निकल रहे हैं और जो निकलें हैं वह भी सींचाई के अभाव से सूखने के कगार तक पहुंच चुके हैं।
क्षेत्र में करीब डेढ़ माह पहले ही गेहूं बिजाई का कार्य शुरू हुआ था। करीब एक माह तक जोरों पर जारी रहे से यह कार्य दो हफ्ते पहले ही खत्म हुआ था।
ज्यादातर खेतों में इतने दिन बीत जाने के बाद भी अंकुर बाहर नहीं निकले जबकि बीजाई के 10-12 दिनों के भीतर ही सारे अंकुर बाहर आकर खेतों में हरियाली पैदा कर देते हैं। इस का मुख्य कारण इस बार समय पर बारिश का न होना माना जा रहा है।
क्षेत्र के किसान अभेचंद, दिनेश कुमार, पूर्ण चंद, शादी लाल, हरबंस लाल, कृष्ण सैनी, तरसेम लाल व सुभाष चंद्र आदि का कहना है कि लगभग सूखे के कगार तक पहुंच चुके हैं।
जिन किसानों ने बारिश की उम्मीद लगा कर बीजाई की थी उनके खेत तो अभी तक भी खाली पड़े हैं बीज का एक दाना भी अंकुर बन कर बाहर नहीं निकला।
क्षेत्र में हालांकि सिंचाई के लिए नहरें भी है, मगर पर्याप्त मात्रा में पानी न होने से सींचाई करने में दिक्कतें आ रही है।
सब से बड़ी समस्या तो यह है कि अगर नहर के पानी से सिंचाई करने के चार-पांच दिनों के अंदर बारिश होती है तो पूरी फसल खराब भी हो सकती है।
इस फसल को मंजिल तक पहुंचाने के लिए मात्र एक आध बार पानी लगाने की भी आवश्यकता होती है। किसानों का कहना है कि अब इस फसल का सारा दारोमदार नहर के पानी से ज्यादा बारिश पर ही निर्भर करता है अगर दो-तीन दिनों तक बारिश हो जाती है तो हमारी इस फसल को लेकर उम्मीद कायम रहेगी वरना टूट ही जाएगी।
बिश्नाह में भी किसानों का कहना है कि एक-दो रोज में बारिश नहीं हुई तो वे फसलों के नुकसान को बचा नहीं पाएंगे।
किसानों ने कहा कि नहरों की सफाई न हो पाने से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। इससे फसलों को तो नुकसान हो ही रहा है। जानवरों के चारे के काम आने वाली बरसीन भी पीली पड़ने से खराब हो रही है।