रियासत में अब तक गलबहियां डाले नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस में तिरसठ का आंकड़ा छत्तीस में बदलता दिखने लगा है। साथ ही गठबंधन सरकार पर हमलावर रही पीडीपी की कांग्रेस से निकटता बढ़ रही है।
मिशन 2014 के तहत वोट बैंक के उलझे गणित को सुलझाने के फार्मूले की तलाश पूरी होती नजर आ रही है। पीडीपी की ओर से इसके संकेत भी मिल रहे हैं लेकिन कांग्रेस अभी पत्ते नहीं खोलना चाहती।
नेशनल कांफ्रेंस को पीडीपी और कांग्रेस के बीच पक रही खिचड़ी का इलहाम हो गया है।
कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच हाल के दिनों में दूरियां बढ़ी हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कई मौकों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
विधानसभा में कांग्रेस और नेकां के मंत्रियों में तीखी नोकझोंक हुई। जिसमें एक दूसरे को गठबंधन छोड़ने की चुनौती भी दी गई। इन परिस्थितियों ने पीडीपी के लिए कांग्रेस से निकटता बढ़ाने का रास्ता साफ किया।
पीडीपी ने दिए संकेत
पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात नए गठजोड़ का संकेत दे रही हैं।
पीडीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने नए सियासी समीकरण की पुष्टि की है। बेग ने कहा, ‘एकबार फिर हालात 2002 की तरह बन रहे हैं।
पीडीपी और कांग्रेस ने पहले अच्छी तरह सरकार चलाई। हम एक दूसरे की भावनाओं का आदर करते रहे। पीडीपी के कहने पर आर्मी ने आपरेशन क्रेक डाउन बंद कर सिविलि पुलिस को जिम्मेदारी दी थी।’
उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रीय राजनीति को अहम मानते हुए रियासत के हित पर कांग्रेस और पीडीपी में सहमति बन सकती है।
कांग्रेस ने नहीं किया साफ
इस संबंध में रियासत कांग्रेस के अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज कहते हैं कि नए समीकरण के बारे में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस आलाकमान इस बारे में राजनीतिक हालात को देखकर फैसला लेगा।
उधर नेकां के एडिशनल जनरल सेक्रेटरी डा. शेख मुस्तफा कमाल का कहना है कि कांग्रेस अगर पीडीपी के साथ जाती है तो नेकां पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस नई दोस्ती से नेकां का कोई सरोकार नहीं है।