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तीन राज्यों में नहीं बन रहा समन्वय

Sat, 08 Nov 2014 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
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दरियाई पानी को बांध कर तैयार की गई रणजीत सागर बांध की झील को नेशनल वेटलैंड्स कंजरवेशन प्रोग्राम के तहत लाने की कवायद ठंडे बस्ते में चली गई है।
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रियासत के अलावा पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरहदों को छूती झील के किनारे जैव विविधता और प्राकृतिक नजाराें को सहेज कर रखने का काम अधर में लटका पड़ा है।

रणजीत सागर बांध की साइट एनडब्ल्यूसीपी के राष्ट्रीय मानचित्र पर लाने के लिए सात साल पूर्व कवायद शुरू की गई थी। बरसों गुजर जाने के बावजूद रणजीत सागर बांध की झील को वैटलैंड का मुकम्मल दर्जा नहीं मिल पाया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इसमें सबसे बड़ी अड़चन तीन राज्यों के बीच संवादहीनता और मतभिन्नता बना हुआ है।

दरअसल वर्ष 2006 के जनवरी में नेशनल वैटलैंड्स कंजरवेशन प्रोग्राम के तहत केंद्र से आई उच्च स्तरीय टीम ने बांध परियोजना स्थल पर वन्य जीव, वन, मत्स्य पालन के प्रदेश स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की थी।
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टीम ने जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों को वैटलैंड संबंधी प्रस्ताव समझाए और रिपोर्ट सौंपने को कहा। आज तक लेकिन वैटलैंड परियोजना के प्रस्ताव को मूर्त रूप देना मुमकिन नहीं हो पाया है।

सूत्रों ने बताया कि तीनों ही राज्य अपने अलग प्रस्ताव भेजते रहे हैं जबकि केंद्र सरकार ने तीनों राज्यों को इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट तैयार करने की सलाह दी है जो अब तक अमल में नहीं लाई जा सकी है।
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गौरतलब है कि रणजीत सागर बांध की झील का फैलाव 7 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है। जबकि इसके चारों तरफ लगने वाली भूमि का विस्तार 6086 वर्ग किलोमीटर है।

वैटलैंड परियोजना अमल में लाई जाती है तो न सिर्फ इतने बड़े इलाके की जैवविविधता को बचाए रखने में मदद मिलेगी बल्कि वैटलैंड की वजह से झील का पर्यटन महत्व भी बढ़ जाएगा।
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