पहली बार पाकिस्तानी गोलाबारी का निशाना बने अरनिया कसबे के लोगों के लिए यह दिवाली कभी भूलने वाली नहीं होगी। कसबे के ज्यादातर लोग सुरक्षित जगह शिविरों, रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हैं। इसके बाद जो कुछ लोग गांव में बचे, उनके लिए दिवाली की रात भी खौफ में गुजरी।
पिछले दिनों गोलाबारी ने अरनिया में बड़ी तबाही मचाई थी। तब से ही गांव के अधिकतर लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए। दिवाली से ठीक पहले जब लोग कुछ लोग घरों में त्योहार मनाने की खुशी लेकर आने लगे थे तो पाकिस्तान ने उसी समय जहर उगला।
इसके बाद वह लोग उल्टे पांव शिविरों में वापस चले गए थे। हाल यह है कि दिवाली पर बमुश्किल पांच से सात प्रतिशत लोग ही गांव रुके होंगे। इन लोगों ने डर के साये में लक्ष्मी पूजा की, लेकिन दहलीज के अंदर तक ही रोशनी की। पटाखे छोड़ने की बात तो दूर इन लोगों ने उस जगह तक रोशनी नहीं की, जिसे से दूर से देखा जा सके।
बुजुर्ग जनक सिंह ने कहा कि पूरी उम्र में उन्होंने ऐसे खौफ में कभी दिवाली नहीं मनाई। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उन्हें ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा।
दिवाली की रात को कमरे का दरवाजा खुला रखने की परंपरा है, लेकिन खौफ का आलम यह रहा कि लोगों ने किवाड़ बंद रखे। दहशत इसलिए और बढ़ गई थी कि वीरवार की सुबह तक पाकिस्तान की ओर से भारतीय चौकियों पर गोलाबारी की गई थी।
बड़ी बात यह कि अरनिया समेत सीमा से सटे अन्य गांवों में पटाखों के स्टाल नहीं लगाए गए। दुकानदारों का कहना था कि एक तो अधिकतर लोग पलायन कर गए हैं और दूसरी ओर गोलाबारी के डर से पटाखे कौन चलाना चाहेगा। अरनिया सेक्टर समेत सांबा और कठुआ जिले में पाकिस्तानी ने दिवाली पर भी गोलाबारी की।
अरनिया सेक्टर को पाकिस्तान पिछले कई दिनों से निशाना बना रहा है। इसके चलते आरएस पुरा सेक्टर में भी लोगों में दहशत रही। सीमावर्ती लोगों ने शिविरों में पूजा की। शाम से पहले ही अपने गांवों में दीये जलाने के बाद शिविरों में वापस आ गए। सरपंच चौधरी वचन लाल, पूर्ण चंद का कहना है कि दहशत के चलते लोगों ने शिविरों में ही रहना ही उचित समझा।