भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी से हालात फिर से नाजुक हो गए हैं। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, तो सुरक्षातंत्र सकते में आ गया है। इस बीच सुरक्षा एजेंसियाें के कान खड़े हो गए हैं।
दिन ब दिन संवेदनशील होते जा रहे हालात के बीच न सिर्फ सीमा पर सुरक्षा को पुख्ता किया गया है, बल्कि भीतरी इलाकों में भी अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
गोलाबारी के बाद सीमा से सटे इलाकों में जगह-जगह नाकेबंदी कर दी गई है तथा दरियाई नालों पर सख्ता पहरा लगा दिया गया है।सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी के बीच सुरक्षा एजेंसियों को सबसे ज्यादा खतरा घुसपैठ को लेकर है।
इसके चलते सरहदी इलाकों से सटे दरियाई नालों पर जगह जगह नाकेबंदी बढ़ा दी गई है। दरअसल, भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पांच किलोमीटर दायरे में 57 गांव आते हैं।
ऐसे में छिटपुट फायरिंग हो या फिर मोर्टार शेलिंग, सरहद के निकटवर्ती गांवों के जीवन पर व्यापक असर पड़ता है। वहीं सुरक्षा की दृष्टि से भी तनावपूर्ण हालात बेहद संवेदनशील बन जाते हैं।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी के चलते घुसपैठ के प्रयासों की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए पुलिस सहित अन्य सुरक्षाबलों की संयुक्त गश्त और अतिरिक्त तैनाती को सुनिश्चित किया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लेकर जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे तक के इलाके को खंगाला जा रहा है। नाकेबंदी कर पूरे जिले को अलर्ट पर रखा गया है। इसी तरह से सीमावर्ती इलाकों के ग्रामीणों को आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का विकल्प भी रहता है।