श्रीनगर। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की 27वीं बैठक में सोमवार को जारी यात्रा का जायजा लिया गया। राज्यपाल एनएन वोहरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बोर्ड के सभी सदस्य मौजूद थे। बैठक में खासतौर पर गत 18 जुलाई को बालटाल में हुई हिंसा के बाद पैदा हालात और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था एवं सुविधाओं पर चर्चा हुई। बैठक में यात्रा के संचालन पर संतोष जाहिर किया गया। श्राइन बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार गुप्ता ने विस्तार से हर मुद्दे पर जानकारी दी। बैठक में यात्रा के दौरान विभिन्न कारणों से मरने वाले 37 श्रद्धालुओं के परिवार वालों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की गई।
बोर्ड के सदस्यों ने बालटाल में हिंसा और इसके बाद फैली अफवाहों के बावजूद स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस और प्रशासन की सराहना की। उन्होंने बोर्ड के सीईओ से कहा कि इस मसले की गहराई से जांच करने के बाद रही खामियों को दूर किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो। बैठक में बोर्ड सदस्य श्री श्री रवि शंकर, पंडित भजन सोपोरी, सुनिता नारायण, सेवानिवृत्त जस्टिस जीडी शर्मा, वेद कुमारी घई, विजय धर और अतिरिक्त सीईओ प्रीतपाल सिंह मौजूद थे।
बैठक में बोर्ड सदस्यों ने यात्रा के पारंपरिक ट्रैक चंदनबाड़ी-शेषनाग से बर्फ हटाकर ट्रैक को यात्रा लायक बनाने के लिए संबंधित एजेंसियों की प्रशंसा की गई। इस मौके पर सीईओ ने नुनवन और बालटाल स्थित आधार शिविरों में साफ-सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने की जानकारी बोर्ड को दी। उन्होंने बताया कि पवित्र अमरनाथ गुफा के पास भी डीआरडीओ की तकनीक वाले बायो डाइजस्टर टायलटों को अन्य जगहों पर वैज्ञानिकों के सहयोग से स्थापित करने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।
इस संबंध में बोर्ड के चेयरमैन ने जल्द रिपोर्ट तैयार करने की हिदायत सीईओ को दी। बैठक में बताया गया कि विगत रविवार शाम तक 2,51,373 श्रद्धालुओं ने एडवांस में पंजीकरण कराया। 1,15,689 श्रद्धालुओं ने तत्काल पंजीकरण के जरिए यात्रा की। बोर्ड द्वारा दोनों यात्रा ट्रैकों के मुख्यद्वार चंदनबाड़ी और दोमेल में सीसीटीवी कैमरों को स्थापित करने और इन्हेें इंटरनेट के जरिये सीधे राजभवन से जोड़े जाने को सही कदम करार दिया गया। श्रद्धालुओं को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए कुल 67 मेडिकल सेंटर स्थापित किए गए हैं।
सीईओ ने स्प्ष्ट किया कि अब तक 33 श्रद्धालुओं की मौत मेडिकल कारणों और चार श्रद्धालुओं की मौत दुर्घटनाओं की वजह से हुई है।