जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट विंग के जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर ने अंजुम निसार मलिक तथा अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष (स्टेट) को लाइब्रेरियन के सात पदों को प्रमोशनल कोटे से न हटाने के निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में पेश हुए एडवोकेट एसएस अहमद ने अपनी दलील रखते हुए कोर्ट को बताया कि सरकार (अभियोजन पक्ष) की ओर से लाइब्रेरियन के सात पदों के लिए याचिकाकर्ताओं की अनदेखी करते हुए सीधे नियुक्ति करने को लेकर विज्ञापन जारी कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं के साथ अभियोजन पक्ष की ओर से बिना उनकी किसी गलती के भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया है। याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया और साथ ही अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि 8000-13500 के ग्रेड के लाइब्रेरियन (उच्च शिक्षा विभाग) के सात पदों को प्रमोशनल कोटे से न हटाया जाए।उच्च शिक्षा विभाग में लाइब्रेरियन के सात पदों को स्टे करने का निर्देश जारी करते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट की ओर से कोर्ट में पेश की गई दलील में कहा गया है कि यदि विवादित एसआरओ को जारी रखा गया तो इससे याचिकाकर्ताओं को प्रमोशन मिलना मुश्किल होगा और उनकी शैक्षणिक योग्यता बीलिब, एमलिब होने के बावजूद उन्हें नान गजटेड रैंक से रिटायर होना पड़ेगा। यहां तक कि जब याचिकाकर्ता भर्ती हुए थे उस समय जो नियम लागू थे उनके मुताबिक गजटेड कैडर में उनकी प्रमोशन होना सुनिश्चित थी पर विवादित एसआरओ ने उनसे उनकी प्रमोशन के अवसर छीन लिए हैं। साथ ही याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट ने कोर्ट के समक्ष दलील रखी की अभियोजन पक्ष को ऐसे याचिकाकर्ताओं के सर्विस करियर के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए जिन्होेंने उच्च शिक्षा विभाग में 11 से 18 वर्ष तक नौकरी की हो और जो प्रमोशन के लिए हर लिहाज से पात्र हों। जेएनएफ