जम्मू। किन्नर बच्चों को स्कूल में दाखिला न देने के मामले में दर्ज एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस डीएस ठाकुर की खंडपीठ ने सरकार से चार सप्ताह के अंदर एक्शन रिपोर्ट मांगी है। मियां हाजी सारिया ने बच्चों के शिक्षा के अधिकार की मांग को सुनिश्चित करने और निजी स्कूलों द्वारा दाखिले के दौरान किन्नर बच्चों से भेदभाव न करने के आदेश देने की अपील की है। मियां हाजी ने दो किन्नरों के बच्चों के दाखिले के लिए निजी स्कूल में फार्म भरे थे लेकिन बच्चों के किन्नर होने के कारण स्कूल ने उन्हें दाखिला देने से इंकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि आज भी हमारा समाज सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्कूल, काम के स्थान, हास्पिटल, थिएटर आदि में किन्नरों के साथ दुर्व्यवहार करता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकारों को नौ निर्देश दिए हैं, जिसमें किन्नरों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें थर्ड जेंडर घोषित किया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें यह भी अधिकार दिया गया है कि वे पुरुष, महिला या थर्ड जेंडर के रूप में अपनी पहचान दर्शा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि हिजड़ों को कई बार यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है। इसलिए उनके लिए एचआईवी सेरो सर्विलांस सेंटर बनाए जाएं। इसके अलावा जिन शर्मनाक और मानसिक तनाव की परिस्थितियों से उन्हें गुजरना पड़ता है, उसके रोकथाम के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाए। उनके लिए सार्वजनिक स्थलों पर अलग शौचालय, समाज कल्याण योजनाएं बनाने के साथ समाज में उनके सम्मान का ख्याल रखे। इस मौके पर सीनियर एएजी गगन बसोत्रा ने कहा कि जेएंडके सरकार द्वारा इस संबंध में उठाए गए व्यापक कदम की रिपोर्ट जल्द पेश करेंगे। डिवीजन बेंच ने उन्हें चार सप्ताह का समय दिया है। जेएनएफ