जम्मू/वाराणसी। अमेरिका के फ्लोरिडा में वर्ष 2015 में लगने वाली प्रदर्शनी में बनारसी मोम की मूर्तियां अपना आकर्षण बिखेरेंगी। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को चाहे चिलचिलाती धूप में रखा जाए या माइनस 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में, इन पर कोई असर नहीं होगा। यही नहीं, मोम की ये मूर्तियां संगमरमर की मूर्तियों का एहसास भी कराएंगी और इनकी चमक बरकरार रखने के लिए सिर्फ शैंपू ही काफी है। बनारस निवासी और बीएचयू के छात्र प्रत्युष उपाध्याय और अविजित त्रिपाठी ने मूर्तियां बनाने के लिए हाई केमिकली मोडिफाइड (उच्च रासायनिक परिवर्तन) वैक्स अथवा अनोखी मोम ‘वैक्सिलीन’ तैयार की है। उनकी इस तकनीक को बीते साल नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला में गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है। इन्होंने इसका अपनी कंपनी कृतिका पॉलीकार्प्स के जरिए आईआईटी बीएचयू में पंजीकृत कराया है। देश भर के कलाकारों की मदद से बनारस में ही इस मोम से मूर्तियां तराशी जा रही हैं। बीएचयू और काशी विद्यापीठ के बीएफए, एमएफए के मूर्तिकला के छात्र-छात्राओं को भी प्रशिक्षण के माध्यम से इससे जोड़ा जा रहा है। वहीं, बाहर के मूर्ति कलाकारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। बीएचयू के दृश्य कला संकाय और आईआईटी के फैकल्टी मेंबर भी काम कर रहे हैं। इस बारे में प्रत्युष उपाध्याय कहते हैं कि मालवीय कला ग्राम में देश भर के कलाकार मूर्तियां तराशने का काम कर रहे हैं। इसके लिए शांति निकेतन कोलकाता के कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। केरल ललित अकादमी में प्रशिक्षण शिविर लगाने की तैयारी हो रही है।